राजधानी में सुरक्षा से आगे बढ़कर अब सीसीटीवी नेटवर्क को स्मार्ट सिटी प्रबंधन का बड़ा टूल बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने मौजूदा सिस्टम के अपग्रेड और नई तकनीकों के समावेश के लिए निजी एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रस्तावित योजना के तहत 50 हजार नए कैमरे लगाए जाएंगे, जिनकी मदद से न सिर्फ निगरानी बल्कि सड़कों के गड्ढे, कूड़ा, धूल प्रदूषण जैसी शहरी समस्याओं पर भी नजर रखी जा सकेगी।
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने मौजूदा नेटवर्क की व्यापक समीक्षा और नई तकनीकों के साथ अपग्रेड प्लान तैयार कराने के लिए निजी एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की है। नई योजना के तहत सीसीटीवी सिस्टम को सिर्फ सुरक्षा तक सीमित रखने के बजाय शहरी प्रबंधन और स्मार्ट मॉनिटरिंग टूल के रूप में विकसित करने की योजना है।
पीडब्ल्यूडी के दस्तावेजों के अनुसार, मौजूदा सीसीटीवी सिस्टम की तकनीकी क्षमता, कमियों, कवरेज गैप और उपयोगिता का विस्तृत अध्ययन कराया जाएगा। इसके आधार पर एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार होगी, जिसमें पूरे सिस्टम के अपग्रेड की रूपरेखा तय की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, मौजूदा नेटवर्क कई मामलों में तकनीकी रूप से पुराना हो चुका है। स्टोरेज, नेटवर्क कनेक्टिविटी, डेटा प्रोसेसिंग और निगरानी क्षमता जैसी चुनौतियों को देखते हुए इसे आधुनिक तकनीक से लैस करने की जरूरत है।
यही वजह है कि नई योजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित फीचर्स को शामिल किया जा रहा है। इसमें फेस रिकग्निशन, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) और भीड़ या संदिग्ध गतिविधियों की पहचान जैसे एडवांस टूल शामिल होंगे। इसकी खासियत यह है कि सीसीटीवी का इस्तेमाल अब केवल अपराध रोकथाम तक सीमित नहीं रहेगा। कैमरों के जरिये सड़कों पर गड्ढों की पहचान जैसे कार्य होने से नगर निगम और पीडब्ल्यूडी को मेंटेनेंस कार्यों की निगरानी में मदद मिलेगी और शिकायतों के समाधान में तेजी आ सकती है।
एक प्लेटफॉर्म पर हो सकेगी लाइव मॉनिटरिंग
योजना के तहत दिल्ली में 50 हजार नए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने पहले पूरे शहर में विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसे स्थानों की पहचान करना है जहां निगरानी की जरूरत अधिक है। पूरे सिस्टम को एकीकृत करने के लिए एक अत्याधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर विकसित करने की योजना भी है। इसके जरिये दिल्ली पुलिस, पीडब्ल्यूडी और अन्य संबंधित एजेंसियां एक ही प्लेटफॉर्म पर लाइव मॉनिटरिंग कर सकेंगी। नई योजना में साइबर सिक्योरिटी को भी अहम प्राथमिकता दी गई है।
मौजूदा सिस्टम में ये बड़ी कमियां सामने आईं
दस्तावेज में साफ तौर पर संकेत दिया गया है कि दिल्ली में लगे मौजूदा सीसीटीवी नेटवर्क में कई तकनीकी और ऑपरेशनल कमियां मौजूद हैं। इनमें कई जगहों पर निगरानी का दायरा सीमित है, यानी कैमरों के बावजूद कई इलाके प्रभावी कवरेज से बाहर हैं। नेटवर्क कनेक्टिविटी, डाटा स्टोरेज, साइबर सुरक्षा और सिस्टम इंटीग्रेशन से जुड़ी चुनौतियां भी चिन्हित की गई हैं। इन कमियों को देखते हुए अब पूरे सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तृत आकलन और अपग्रेड प्लान तैयार किया जा रहा है। राजधानी में 2018 से अब तक दो चरणों में करीब 2.8 लाख कैमरे लगाए गए। इनमें से पहले चरण में लगाए गए अधिकांश कैमरे चीनी कंपनियों के हैं और सिम-आधारित तकनीक पर काम करते हैं। विशेषज्ञों ने इन कैमरों के जरिये डेटा लीक होने और राष्ट्रीय सुरक्षा पर संभावित खतरे की आशंका जताई थी।