फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बस में दुष्कर्म: पीड़िता ने बताई खौफनाक कहानी, पर्दे से बांधे हाथ-पांव...; पुलिस चार्जशीट में खुलेंगे गहरे राज

Wed, 02 Sep 2026 05:29 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

बस में 16 वर्षीय किशोरी के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस जल्द ही चार्जशीट दाखिल कर सकती है। पुलिस ने जांच में कई अहम सबूत जुटा लिए हैं। घटना  ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के कश्मीरी गेट के बीच चलने वाली एक बस में हुई थी।
विज्ञापन
चलती बस में किशोरी से दुष्कर्म मामला - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली पुलिस स्लीपर बस में 17 साल की किशोरी के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में तह तक जांच करने में जुट गई है। इसके लिए पुलिस सीसीटीवी फुटेज और एक आरोपी के मोबाइल फोन की लोकेशन का इस्तेमाल कर बस के पूरे रूट का पता लगा रही है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि अगस्त के पहले हफ्ते में हुई इस घटना के मामले में पुलिस जल्द चार्जशीट दाखिल करेगी।

विज्ञापन


पुलिस ने दोबारा दर्ज किए पीड़िता के बयान
पुलिस ने पीड़िता के बयान दोबारा दर्ज किए। पीड़िता ने कहा कि पर्दे से उसके हाथ-पांव बांधने की कोशिश की गई थी। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस चार अगस्त की रात बस की आवाजाही का पता लगाने के लिए कई जगहों से इकट्ठा की गईं सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है, जिसमें कश्मीरी गेट, तिमारपुर पार्किंग और ग्रेटर नोएडा में परी चौक शामिल हैं। 

सीसीटीवी से भी बस रूट पता लगाने की कोशिश
एक कैमरे में बस को हनुमान मंदिर फ्लाईओवर पर चढ़ते हुए देखा गया। जांचकर्ताओं का मानना है कि इससे बस के रूट का पता लगाने में मदद मिलेगी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि बस की आवाजाही का पता लगाने और उन जगहों की पहचान करने के लिए फुटेज का विश्लेषण आरोपी के मोबाइल फोन की लोकेशन डेटा के साथ किया जा रहा है, जहां बस यात्रा के दौरान रुकी हो सकती है।

विज्ञापन

बस के अंदर मिले जांच टीम को सबूत
पुलिस ने बताया कि बस को जब्त करने और आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद उनका पोटेंसी टेस्ट कराया गया। फोरेंसिक जांच के दौरान बस के अंदर लड़की के बाल मिले। जांचकर्ता अब और फोरेंसिक सबूतों के लिए गाड़ी से मिले सीट कवर और दूसरी चीजों की जांच कर रहे हैं। 

पीड़िता के कपड़े, जिन पर खून और वीर्य के दाग हैं, उन्हें फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया है। इनका मिलान दोनों आरोपियों बस ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप के डीएनए सैंपल से किया जाएगा। पुलिस ने कहा कि पीड़िता के कपड़े, सीट कवर और सीसीटीवी कैमरे की फुटेज मामले के अहम सबूत हैं।

बस में स्लीपर बर्थ के चारों ओर कंपनी के लगाए हुए पर्दे थे, जिनकी वजह से आरोपी बाहर के लोगों से अपनी हरकतें छिपा पाए। ट्रैवल कंपनी ने पहले कहा था कि बस के सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे क्योंकि बस की मरम्मत का काम चल रहा था। 

बस कंपनी ने नहीं कराया था आरोपियों को वेरिफेकेशन
पुलिस का दावा है कि बस कंपनी ने आरोपियों का वेरिफिकेशन नहीं करवाया था। जांच में पता चला है कि बस अप्रैल में खरीदी गई थी और 28 अप्रैल को फिरोजाबाद में रजिस्टर कराई गई थी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बस बिना रुके ग्रेटर नोएडा से दिल्ली की ओर कई किलोमीटर तक कैसे चली।

चलती बस में छात्रा से हुई थी दरिंदगी
राजधानी दिल्ली में एक बार फिर निर्भया जैसा कांड सामने आया। इस घटना ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के कश्मीरी गेट के बीच चलने वाली एक स्लीपर बस में यह वारदात हुई। बस में 16 वर्षीय छात्रा के साथ कथित तौर पर चालक और कंडक्टर ने सामूहिक दुष्कर्म किया। मामला दिल्ली के कश्मीरी गेट थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। पुलिस ने दोनों आरोपी चालक और कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना 4 अगस्त 2026 की बताई गई है। वारदात में इस्तेमाल की गई बस को भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया। पीड़िता मैनपुरी जिले की रहने वाली है और 11वीं कक्षा में पढ़ाई कर रही है। छात्रा 3 अगस्त 2026 को अपने घर से बिना बताए निकली थी। वह पढ़ाई को लेकर मां की डांट से नाराज थी। उसका इरादा नोएडा सेक्टर-63 में रहने वाले अपने चचेरे भाई के घर जाने का था।
विज्ञापन

क्या था दिल्ली का निर्भया कांड
16 दिसंबर 2012 को दिल्ली के वसंत विहार में एक चलती बस में निर्भया के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था और उसे मरने के लिए सड़क पर फेंक दिया गया था। इस दौरान उसके साथ उसका साथी अवनींद्र भी उसी बस में सवार था। घटना के सात साल तीन महीने बाद निर्भया को इंसाफ मिला था। निर्भया के गुनहगारों में अक्षय ठाकुर, मुकेश सिंह, विनय शर्मा और पवन गुप्ता सहित छह लोग शामिल थे। इसमें रामसिंह नामक एक आरोपी ने जेल में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी और एक नाबालिग को सुधार गृह से रिहा कर दिया गया था। वहीं निर्भया के चारों गुनहगारों अक्षय ठाकुर, मुकेश सिंह, विनय शर्मा और पवन गुप्ता को 20 मार्च 2020 की सुबह 5.30 बजे फांसी पर लटका दिया गया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें