अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि निजामुद्दीन थाना पुलिस ने मरकज के मौलाना मोहम्मद साद को कई बार बुलाया था। बीट अफसर मौलाना मोहम्मद साद को तीन बार बुलाने गया था कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मिलने बुला रहे हैं। मौलाना साद हर बार कह देते थे कि वह मिलने आ रहे हैं, मगर वह पुलिस अफसरों से नहीं मिले। उनकी जगह मरकज कमेटी के अन्य लोग पुलिस अफसरों से मिलने गए थे।
आरोप है कि मौलाना मोहम्मद साद ने सूचना को छिपाया। उन्होंने धर्म के नाम पर जमातियों को बहकाया और उनसे कहा था कि कोरोना कोई बीमारी नहीं है बल्कि एक मुस्लिम को दूसरे मुस्लिम से अलग करने की साजिश है। साथ में उन्होंने जमातियों से पैसा ले रखा था, इस कारण मरकज को खाली नहीं कराया गया था।