प्रधान गृह सचिव धर्मपाल ने फाइलों की निगरानी में एक उप निरीक्षक समेत पांच पुलिस कर्मियों की तैनाती गृह विभाग विंग में कर दी है। वजह साफ है कि गृहमंत्री सत्येंद्र जैन की तरफ से प्रधान गृहसचिव के कनिष्ठों को भेजे गए नोट को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
गृहमंत्री ने नोट में न सिर्फ धर्मपाल को अनधिकृत तरीके से ऑफिस में बैठने की बात लिखी है बल्कि कनिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सरकार के गृह सचिव राजेंद्र कुमार हैं तो फाइलें उन्हें भेजें।
सूत्र बताते हैं कि दिल्ली सरकार की तरफ से राजेंद्र कुमार को अतिरिक्त चार्ज देने केसाथ ही गृहमंत्री केनोट और मौखिक तौर पर कहा गया है कि गृह सचिव की फाइल इन्हें भेजी जाए। बताते हैं कि कुछ फाइलें राजेंद्र कुमार ने बतौर सचिव साइन की थीं।
ये है मामला
इनमें से करीब आधा दर्जन फाइल गृह मंत्रालय ने लौटा दी हैं। मसलन गृह मंत्रालय सीधे तौर पर धर्मपाल को प्रधान गृह सचिव मान रहा है। फिर उपराज्यपाल की बैठक में भी बतौर गृह सचिव धर्मपाल ही जा रहे हैं।
‘अमर उजाला’ के पास मौजूद गृहमंत्री के नोट में साफ लिखा गया है कि धर्मपाल को प्रधान सचिव के पद से 9 जून की दोपहर को ही हटा दिया गया है। फिर भी यदि अभी धर्मपाल प्रधान सचिव केकार्यालय में है तो इसे अनधिकृत कब्जा माना जाए।
अगर अब भी वह कब्जा नहीं छोड़ते हैं तो उनके खिलाफ प्रशासनिक एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अब कैसे होगा समाधान
वहीं मुख्यसचिव ने नोट में कहा है कि वह सुनिश्चित करें कि गृह विभाग की फाइलें अनधिकृत रूप से प्रधान गृह सचिव पद पर कब्जा करने वाले व्यक्ति के पास न जाए बल्कि सेवा विभाग ने आदेश संख्या 297 में जिसे गृह सचिव का चार्ज दिया है, उसके पास फाइल भेजी जाए। इस नोट को सुपरिंटेंडेंट स्तर के अधिकारियों तक मार्क की गई है।
बिजनेस ऑफ ट्रांजेक्शन रूल(टीबीआर) का हवाला देकर प्रधान गृह सचिव समेत कई आईएएस अधिकारी बता रहे हैं कि टीबीआर 55(2) में साफ लिखा है कि प्रधान गृहसचिव, लैंड एंड बिल्डिंग सचिव और पुलिस आयुक्त की नियुक्ति केंद्र सरकार की स्वीकृति से उपराज्यपाल करेंगे। फिर एनसीटी एक्ट में भी प्रशासक के तौर पर उपराज्यपाल को पुलिस, लैंड व पब्लिक ऑर्डर मामले में अधिकार दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निर्देश पर गृहमंत्री के नोट और प्रधान गृहसचिव की तरफ से फाइलों की निगरानी में पुलिस कर्मी की तैनाती को देखते हुए विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। वरिष्ठ अधिकारी मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल के बीच बातचीत करके मसला सुलझाने या कोर्ट से फैसला आए बिना समाधान से इनकार कर रहे हैं।