फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट गई थी दिल्ली पुलिस
एएसजे कोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली पुलिस हाईकोर्ट गई। हाईकोर्ट ने चारों आतंकियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बावजूद बासिर, फयाज और अब्दुल माजिद ने सरेंडर नहीं किया। इस पर कोर्ट ने वर्ष 2014 में तीनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस ने इन पर दो-दो लाख रुपये का इनाम घोषित कर दिया था। इंस्पेक्टर राहुल कुमार सिंह की टीम ने 25 मार्च, 2019 को फयाज अहमद लोन और 11 मई, 2019 को अब्दुल माजिद बाबा को को श्रीनगर से गिरफ्तार कर लिया था।
पैसों के खातिर जैश के लिए काम करने लगा था बासिर
बासिर अहमद पोनू (50) के पिता मछुआरे का काम करते थे, जबकि वह फलों की रेहड़ी लगाता था। वर्ष 1990 में बासिर का चचेरा भाई बासिर अहमद लिस्सू जैश में शामिल हो गया। उसके पास पाक अधिकृत कश्मीर से हथियार व विस्फोटक आने लगे। वर्ष 1992 में पाक से लौटने के बाद उसने बीएसएफ के सामने सरेंडर कर दिया और बीएसएफ का मुखबिर बन गया। लिस्सू के कहने पर बासिर अहमद पोनू भी बीएसएफ का मुखबिर बन गया। वर्ष 2002 में जैश के आतंकी गुलाम रसूल के कहने पर बासिर अहमद पैसे के लिए आतंकी बन गया। उसे तीन हजार रुपये दिए गए।
उसे अन्य युवकों को जैश में भर्ती कराने का जिम्मा दिया गया। पोनू जैश के आतंकी गुलाम रसूल से मिला। उसके कहने पर पूना का परवेज अहमद लाडो भी जैश में शामिल हो गया। जल्द ही बासिर की मुलाकात जैश के अन्य आतंकी सोपोर निवासी गुलाम रसूल बाफांडा और पाक में आतंकी ट्रेनिंग लिए हिजबुल के आतंकी अल्ताफ अहमद किरमानी से हुई। बासिर जल्द ही अल्ताफ अहमद किरनामी का करीबी हो गया। अल्ताफ ने उसे सोपोर के जैश के एरिया कमांडर पाक आतंकी हैदर से मिलवाया। बासिर के कहने पर अब्दुल माजिद बाबा और फयाज अहमद भी जैश में शामिल हो गए। जब ये दिल्ली में आतंकी हमला करने आए तो चार फरवरी, 2004 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया था।