दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दो कुख्यात इनामी गैंगस्टर कमलजीत सिंह और सुनील मलिक को गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस ने दोनों की गिरफ्तारी पर 20-20 हजार रुपये का इनाम रखा हुआ था। बदमाशों के कब्जे से दो सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल, चार मैगजीन और दो दर्जन कारतूस बरामद किए गए हैं। दोनों बदमाशों के खिलाफ 55 से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
स्पेशल सेल के डीसीपी मनीषी चंद्रा के अनुसार पीड़ित सुभाष रावत और कमलजीत ट्रांस यमुना में विवादस्पद प्रापर्टी की खरीद-बिक्री व्यवसाय में पिछले पांच वर्ष से पार्टनर थे। लाभ को लेकर दोनों में जल्द ही विवाद होने लगा। कमलजीत को लगता था कि सुभाष ने उसके साथ 1.5 करोड़ की धोखाधड़ी की है। इसके बाद कमलजीत ने अपने भाई चरणजीत सिंह के साथ मिलकर सुभाष रावत की हत्या की साजिश रच ली।
आरोपियों ने सुभाष रावत को घेरकर 31 जनवरी को बृजपुरी में गोली मारकर हत्या कर दी। सेल में तैनात इंस्पेक्टर ईश्वर सिंह को कमलजीत सिंह व सुनील मलिक के मूवमेंट के बारे में सूचना मिली थी। आठ जुलाई को सटीक सूचना मिली कि दोनों गैंगस्टर जौहरीपुर में किसी मकान में छिपे हैं और दोनों जौहरी एंक्लेव मेट्रो स्टेशन के पास किसी साथी से मिलने आएंगे।
आरोपी जब स्कूटी पर वहां पहुंचे तो पुलिस टीम ने दोनों को सरेंडर करने को कहा। पुलिस को देखकर आरोपियों ने पिस्टल निकाल ली, मगर अलर्ट पुलिस टीम ने मौजपुर, दिल्ली निवासी कमलजीत सिंह(44) और गांव दुंगेर थाना फुगाना जिला मुजफ्फरनगर, यूपी निवासी सुनील मलिक(44) को दबोच लिया।
कमलजीत के खिलाफ 47 आपराधिक मामले दर्ज हैं
स्पेशल सेल पुलिस अधिकारियों के अनुसार कमलजीत के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, रॉबरी, डकैती, एक्सर्टोशन, चोट पहुंचाने, आम्र्स एक्ट और मकोका आदि के 47 अपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से छह केसों में वह कोर्ट में पेश नहीं हो रहा था।
नोएडा में बिल्डिंग मैटेरियल सप्लाई करता था
मुजफ्फरनगर, यूपी निवासी सुनील मलिक नोएडा में बिल्डिंग मैटेरियल सप्लाई करता था। वर्ष 2013 में ये गाजियाबाद के स्थानीय बदमाशों के संपर्क में आया। इसने अपने साथी के साथ 25 लाख रुपये लूटे। इस मामले में ये गिरफ्तार हुआ। बाद में इसके खिलाफ वाहन चोरी व आर्म्स एक्ट का मामला दर्ज हुआ।
वर्ष 2017 में इसने अपने साथी के साथ मिलकर लाला की हत्या कर दी थी। इसके बाद ये कमलजीत के गिरोह में शामिल हो गया और उसके शार्प शूटर के तौर पर काम करता था।