दोनों को जाफरपुर कलां स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया। तीसरे बदमाश बवाना निवासी निशांत उर्फ निशू ने सरेंडर कर दिया। इनके कब्जे से .32 बोर की पिस्टल, 9 एमएम की पिस्टल, .315 बोर का कट्टा और दस कारतूस बरामद किए गए हैं।
गिरोह में सरदार के रूप में जाना जाता था
सुरजीत गिरोह में सरदार के रूप में जाना जाता था। वह संदीप का 20 वर्ष से दोस्त है। ये हत्या के प्रयास में वर्ष 2000 में गिरफ्तार हुआ था। जेल में उसकी संदीप से मुलाकात हुई। संदीप ने जेल में उसकी सहायता की थी। इससे दोनों दोस्त बन गए। ये संदीप के कहने पर दिल्ली और हरियाणा में कारोबारियों से उगाही करता था और नए लड़कों को गिरोह में शामिल होने के लिए प्रेरित करता था।
सुरजीत संदीप से आगे की रणनीति के लिए महीने में एक बार जरूर मिलता था। प्रमोद दीपक उर्फ भांजा और संजय कैरा के जरिये संदीप के संपर्क में आया था। प्रमोद ने मौलाना आजाद कॉलेज से संदीप को छुड़ाने में सहायता की थी। इसने 18 जुलाई, 2019 को बवाना के एक व्यवसायी से 50 लाख रुपये की रंगादारी मांगी थी।