दिल्ली पुलिस रोज औसतन 15 से 20 विसरा एफएसएल जांच के लिए भेजती है। एक महीने में औसतन 350 से 400 विसरा एफएसएल जांच के लिए भेजे जाते हैं। हालांकि एफएसएल में विसरा जांच करने वाले विशेषज्ञों की तादाद जरूरत का केवल 50 फीसदी बताई गई है।
इस कारण विसरा जांच की देरी बढ़ती रहती है। उधर, हाईप्रोफाइल केसों में विसरा रिपोर्ट कुछ ही महीने में आ जाती है। जो विसरा हाईप्रोफाइल केस से संबंधित नहीं हैं या मीडिया की सुर्खियां नहीं बनते, वे सालों या तो पुलिस थानों या फिर एफएसएल में पड़े रहते हैं।
रोहिणी स्थित एफएसएल के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस के पास हर रोज 15 से 20 विसरा आते हैं। कोशिश रहती है कि जांच कर रिपोर्ट जल्द से जल्द दे दी जाए। कश्मीरी गेट इलाके में केमिकल्स से झुलसकर मरे तीनों युवकों का विसरा एफएसएल पहुंच गया है। इसी तरह जामिया नगर इलाके में आग से मौत के मुंह में समाए पांच लोगों का विसरा भी एफएसएल पहुंच गया है।
अधिकारी ने दावा किया कि एफएसएल में विसरा की जांच करने वाले विशेषज्ञों की तादाद जरूरत की करीब 50 फीसदी ही है। इस कारण विसरा की जांच में देरी होती जाती है और पेंडेंसी बढ़ती जाती है। जांच के लिए लंबित विसरा की संख्या पांच हजार पहुंच जाती है।
अभी एफएसएल में बिना जांच किए 1500 से ज्यादा विसरा पड़े हुए हैं। विशेषज्ञों की भर्ती हो जाए तो इनकी जांच हो जाएगी और समय से रिपोर्ट मिल जाएगी।
दूसरी तरफ, हाईप्रोफाइल केसों में विसरा रिपोर्ट करीब एक महीने में आ जाती है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर तिवारी के विसरा की रिपोर्ट एक महीने के अंदर आ गई थी। रोहित शेखर की मौत को पहले स्वाभाविक माना जा रहा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता लगा कि रोहित की हत्या मुंह दबाकर की गई है। उनके विसरा को जहर की जां्च के लिए सुरक्षित रखा गया था।
इसकी रिपोर्ट में उन्हें जहर देने की बात सामने नहीं आई थी। इसी तरह, पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर के विसरा की रिपोर्ट भी एक महीने में आ गई थी। सुनंदा लीला होटल के एक कमरे में मृत पड़ी मिली थीं।
प्राथमिकता पत्र से जल्दी होती है जांच
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, हाईप्रोफाइल केस या जांच जल्द कराने वाले विसरा के लिए प्राथमिकता पत्र लिखना पड़ता है। यह प्राथमिकता पत्र एफएसएल को जाता है, तभी विसरा की जांच जल्द होती है। जो केस हाईप्रोफाइल नहीं होता, उनको जनरल तरीके से भेजा जाता है। उनकी रिपोर्ट आने में सालों लग जाते हैं।
दक्षिण-पश्चिमी जिले के थानों में हैं 36 विसरा
दक्षिण-पश्चिमी जिले के थानों में अभी 36 विसरा पड़े हुए हैं। इनको जांच के लिए एफएसएल भेजा जाना है। काफी समय से ये भेजे नहीं गए हैं। इस जिले के 257 केसों की विसरा रिपोर्ट आनी है। कई महीने बाद भी इनका इंतजार है।