दिल्ली पुलिस अगर आपके बच्चों को पढ़ाने के साथ ही उन्हें नौकरी दिलाने का यकीन दिलाती है तो हैरान होने की जरूरत नहीं है। दरअसल बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली पुलिस अपनी छवि में बदलाव कर रही है। डंडा भांजकर भगाने के बजाय पुलिस की कोशिश लोगों के बीच जाने की है।
समाज में अपनी छवि को सुधारने के लिए दिल्ली पुलिस अब लोगों के बीच जा रही है। पहली कड़ी में उसने समाज के ऐसे युवा और युवतियों को अपने से जोड़ा है, जो बेरोजगार हैं।
पुलिस इन युवाओं को थाने में ट्रेनिंग दे रही है और उन्हें रोजगार दिलाने में मदद कर रही है, ताकि ये बेरोजगार युवा आर्थिक तंगी में अपराध का रास्ता न पकड़ें।
दिल्ली पुलिस ने उन इलाकों को चिह्नित किया है, जहां आपराधिक घटनाओं की संख्या ज्यादा है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ज्यादातर आपराधिक वारदात में देखा गया है कि आर्थिक तंगी की वजह से युवा ऐसा कदम उठाते हैं।
कारगर हुई दिल्ली पुलिस की मुहिम
पुलिस अब इन इलाकों के युवाओं में स्किल डेवलपमेंट के लिए एनजीओ की मदद से थाने में ही कोर्स करवा रही है और कोर्स पूरा होने के बाद उन्हें नौकरी दिलवाने में मदद कर रही है। पुलिस अब तक 500 युवाओं को विभिन्न क्षेत्र में रोजगार दिलाने में कामयाब हुई है।
थानों में चलाए जा रहे कोर्स में ऐसे युवाओं को तरजीह दे रही है, जो बेसहारा हैं। नबी करीम इलाके में रहने वाली शीतल के माता-पिता नहीं हैं। दो बड़ी बहनें उसकी देखभाल करती हैं।
शीतल फिलहाल इंगलिश स्पीकिंग कोर्स कर रही है। उसे इस बात की खुशी है कि कोर्स करने के बाद उसे रोजगार मिलेगा और अपनी बहनों को वह आर्थिक मदद दे पाएगी।
रामनगर में रहने वाले सुधीर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। बुआ के साथ रहने वाले सुधीर ने 12वीं तक पढ़ाई की है। उसे थाने में चल रहे प्रोग्राम के बारे में पता चला। संपर्क करने पर उसने भी कोर्स में दाखिला ले लिया।
क्या दिल्ली पुलिस हो गई कूल?
नबी करीम थाने में कोर्स कर रही पूजा ने बताया कि यहां आने से पहले उनके मन में पुलिस के व्यवहार को लेकर अलग ही सोच थी। लेकिन यहां आने के बाद लगा कि पुलिस काफी कूल है।
वहीं, रोहित का कहना है कि लोगों की धारणा है कि पुलिस आम लोगों के साथ खराब व्यवहार करती है, लेकिन रोहित को अब पता चला कि समाज में पुलिस की जो छवि है, उससे ठीक उलट पुलिस बेहतर और मिलनसार है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि दिसंबर में निर्भया गैंगरेप कांड के बाद दिल्ली में युवा सड़कों पर उतर गए थे। वह पुलिस को एक शासक के तौर पर देखकर उनका विरोध कर रहे थे।
इसमें ज्यादातर ऐसे युवा थे, जिनका पुलिस से कभी वास्ता नहीं पड़ा। पहले से जो पुलिस के प्रति उनके मन में धारणा बनी थी, उसी के आधार पर वह विरोध कर रहे थे। इस विरोध ने पुलिस अधिकारियों को सोचने पर मजबूर किया और फिर पुलिस ने छवि सुधारने के लिए आमजन के बीच जाने का फैसला किया।
बेटियों का कन्यादान करवाएगी पुलिस
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राजधानी में ऐसे अनाथ और गरीब परिवार हैं, जो आर्थिक तंगी की वजह से अपनी बेटियों का विवाह नहीं कर पाते हैं।
पुलिस की कोशिश है कि आने वाले दिनों में वेलफेयर प्रोग्राम के तहत ऐसे परिवारों की बच्चियों की शादी करवाने में अहम भूमिका अदा की जाए। पुलिस अधिकारी इसके लिए रणनीति बनाने में जुटे हैं।
पुलिस उपायुक्त और दिल्ली पुलिस प्रवक्ता राजन भगत ने बताया कि इस योजना का मकसद बेरोजगार युवाओं को रोजगार देकर उन्हें अपराध के रास्ते पर जाने से रोकना है। पुलिस अब तक 10,000 लोगों को कई तरह की ट्रेनिंग दे चुकी है। ट्रेनिंग के बाद सभी अपने जीवकोपार्जन में लगे हैं। इसमें से कई लोग प्राइवेट कंपनी में काम कर रहे हैं तो कइयों ने खुद का काम शुरू किया है।
युवाओं के लिए कोर्स
कटिंग और टेलरिंग
कम्प्यूटर और इंगलिश स्पीकिंग
हेल्थ एंड ब्यूटी ट्रेनिंग प्रोग्राम
मेहंदी लगाने की ट्रेनिंग
मोबाइल रिपेयर कोर्स
इलेक्ट्रिशियन कोर्स
होटल मैनेजमेंट
साक्षात्कार की तैयारी कराना