रोहित के शव के मैक्स अस्पताल से एम्स की मोर्चरी में ले जाया गया तो वहां डॉक्टरों ने संकेत दे दिए थे कि रोहित की हत्या की गई है। इसके बावजूद डिफेंस कॉलोनी, दक्षिण जिला पुलिस सर्तक नहीं हुई। पुलिस स्वाभाविक मौत की कार्रवाई की तैयारी कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करती रही।
इस दौरान आरोपी या आरोपियों को सबूत से छेड़छाड़ का काफी समय मिल गया था। डिफेंस कॉलोनी थाना पुलिस ने सीबीआई की फोरेंसिक टीम को नहीं बुलाया था, बल्कि दिल्ली सरकार की एफएसएल टीम को मौके पर बुलाया था।
सीबीआई की फोरेंसिक टीम को एक्सपर्ट माना जाता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जब रोहित की हत्या का खुलासा हुआ तो सीबीआई की फोरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया था। पुलिस ने शुरुआत में रोहित के परिजनों के मोबाइल व अन्य सबूत एकत्रित नहीं किए थे।