वैकल्पिक स्थलों का हवाला और हाईकोर्ट का नोटिस
सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस ने रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और सीबीडी ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए नए नामित स्थलों के रूप में तय किया है, ऐसे में आईवाईसी की यह याचिका निष्प्रभावी हो जाती है। हालांकि, अदालत ने अनुमति के अनुरोध पर पुनर्विचार करने की प्रार्थना के संबंध में अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
'सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन हुआ'
सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने पीठ को बताया कि पूरी याचिका जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन को लेकर है और जंतर-मंतर को हटाने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन किया गया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाइड किए जाने को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में एक याचिका भी दायर की गई है।
याचिकाकर्ता का पक्ष और आगे की सुनवाई
याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने इस विकास के मद्देनजर याचिका में संशोधन करने की बात कही और अदालत से अनुरोध किया कि वह अन्य प्रार्थनाओं पर पुलिस का रुख स्पष्ट करने को कहे। इसके अलावा, अदालत ने पुलिस को उस प्रार्थना पर भी नोटिस जारी किया जिसमें बिना किसी व्यक्तिगत मूल्यांकन के स्वचालित, यांत्रिक या अनुचित प्रतिबंध लगाने और प्रदर्शन के लिए कम से कम 10 दिन पहले आवेदन करने की अनिवार्य शर्त को चुनौती दी गई है। इस मामले की अगली सुनवाई अब नवंबर में होगी।
सुविधाओं से लैस एक स्थल की आवश्यकता पर जोर
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजीपी) द्वारा सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर मेट्रो स्टेशनों पर प्रस्तावित प्रतिबंधों और ट्रेनों के रद्द किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने प्रदर्शनकारियों के लिए बुनियादी सुविधाओं से लैस एक स्थल की आवश्यकता पर जोर दिया था।
आईवाईसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के माध्यम से दायर इस याचिका में पुलिस के उस 1 अक्तूबर के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। कांग्रेस का युवा विंग मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है।