सुप्रीम कोर्ट के हरित (ग्रीन) पटाखों की अनुमति दिए जाने के बाद दिल्ली-एनसीआर में इस दिवाली पटाखों का इस्तेमाल 40 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसका अंदेशा लोकल सर्कल्स की ओर से एक हालिया अध्ययन के बाद जताया गया है। अध्ययन में बताया गया कि दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद के 38 हजार से ज्यादा लोगों से बातचीत में यह निष्कर्ष निकाला गया है। इनमें से आधे केवल हरित जबकि शेष हरित के साथ सामान्य (परंपरागत) पटाखे जलाने की बात कर रहे हैं।
अध्ययन में यह आशंका भी जताई जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बावजूद परंपरागत पटाखों की अवैध बिक्री और इस्तेमाल बढ़ेगा। पिछले साल जब पूरी तरह से पटाखों पर प्रतिबंध था, तब भी लोगों ने नियम तोड़ते हुए पटाखे जलाए थे। इससे दिवाली के बाद वायु प्रदूषण में भारी वृद्धि हुई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल हरित पटाखों की अनुमति के चलते उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान जैसे आसपास के राज्यों से परंपरागत पटाखों की तस्करी दिल्ली-एनसीआर में हो सकती है, जिससे वायु प्रदूषण की स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।
सीएसआईआर-नीरी से प्रमाणित क्यूआर कोड पटाखों को ही अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्तूबर को एक आदेश में दिल्ली-एनसीआर में 18 से 20 अक्तूबर तक हरित पटाखों की बिक्री और उपयोग की इजाजत दी थी। उन्हीं पटाखों को जलाने की अनुमति दी गई, जिन पर सीएसआईआर-नीरी की ओर से प्रमाणित क्यूआर कोड हो। इन पटाखों को सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे के बीच ही फोड़ा जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि कोर्ट ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना त्योहार मनाने का संतुलन बनाने की कोशिश की है। न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ निर्देश दिए कि नियमों का उल्लंघन करने पर लाइसेंस रद्द किया जा सकता है और सख्त कार्रवाई की जाएगी।