दिल्ली पुलिस ने गजेंद्र आत्महत्या मामले में अपनी एफआईआर रिपोर्ट फाइल कर दी है। दिल्ली पुलिस ने इस एफआईआर में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर जब गजेंद्र फांसी लगा रहा था तो तालियां बजाने और उसे उकसाने का आरोप लगाया है।
इसके साथ ही पुलिस ने इस एफआईआर में ये भी लिखा है कि आप कार्यकर्ताओं ने पुलिस को गजेंद्र को बचाने भी नहीं दिया। पुलिस ने एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर गृह मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपी है।
वहीं गजेंद्र आत्महत्या मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच की टीम को उसके गांव दौसा, राजस्थान भेजा गया है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने गृह मंत्रालय को बुधवार को हुए दुर्भाग्यपूर्ण हादसे की रिपोर्ट सौंपी दी है।
कार्यकर्ताओं ने पुलिस को रोका
बस्सी ने आगे बताया कि उन्होंने इस मामले में आईपीसी की धारा 306, 186 और
34 के तहत एफआईआर दर्ज की है और जो भी कार्रवाई जरूरी होगी वो की जाएगी।
पुलिस के अनुसार तिलक मार्क पुलिस स्टेशन पर तैनात एसएस यादव जो रैली के वक्त जंतर-मंतर पर मौजूद थे उन्होंने सब कुछ अपनी आंखों से देखा। उन्होंने जो कुछ देखा वो सब एफआईआर में दर्ज है।
उनके अनुसार भीड़ में मौजूद कुछ लोग मंच अलग हटकर कुछ और ही देख रहे थे और तालियां बजा रहे थे। उन्होंने जब उस ओर देखा तो पाया कि गजेंद्र झाड़ू लेकर पेड़ पर चढ़ा है और लोग खूब तालियां पीट रहे थे।
ये देखते ही उसने वायरलेस पर कंट्रोल रूम को मैसेज दिया जिसके बाद पुलिस हर में आ गई और वहां मदद के लिए पहुंची। लेकिन आप कार्यकर्ताओं ने पुलिस को रोक लिया क्योंकि पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी थी।
पीसीआर में नहीं ले जाने दे रहे थे अस्पताल
उसने आगे बताया है कि इसी दौरान गजेंद्र अपने गमछे को लपेटकर फांसी लगाने लगा था तो पुलिस ने फायर ब्रिगेड को सूचना दे दी थी। इसी बीच कुछ कार्यकर्ताओं ने मंच पर बैठे अपने नेताओं को इसकी जानकारी दी।
इसके बाद चूंकि फायर ब्रिगेड आने वाली थी इसलिए कुछ लोग गजेंद्र को बचाने के लिए ऊपर चढ़ गए। यादव ने आगे बताया है कि वो लोग गजेंद्र को आराम से भी उतार सकते थे लेकिन उन्होंने उसे लापरवाही से गिरा दिरा।
इसके बाद पुलिस ने जब गजेंद्र को पीसीआर से अस्पताल ले जाना चाहा तो आप कार्यकर्ताओं ने मना कर दिया और पार्टी की गाड़ी से ले जाने लगे। हालांकि किसी तरह पुलिस को गजेंद्र की बॉडी मिल गई और वो उसे आरएमएल अस्पताल ले गए।