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ये हैं गजेंद्र की मौत से जुड़े पांच अनसुलझे सवाल

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आज भले ही पूरे देश में गजेंद्र के आत्महत्या की आवाज सुनाई दे रही है पर, बुधवार को आम आदमी पार्टी की रैली में वह लगातार कुछ कहना चाहता था लेकिन उस वक्त किसी ने उसकी ओर ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा।
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गजेंद्र के मौत की खबर आते ही आम आदमी पार्टी से लेकर कांग्रेस, भाजपा और दिल्ली पुलिस तक हर कोई यह साबित करने में लग गया कि गजेंद्र की मौत के लिए कम से कम वह जिम्मेदार नहीं हैं।

इस बीच पिछले चौबीस घंटे में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो इस दर्दनाक घटना से जुड़े अनसुलझे पहलुओं की ओर इशारा करते हैं। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान दिल्ली पुलिस, आप नेता और वहां मौजूद भीड़ या आप वॉलिंटयर्स, जो वहां मौजदू थे उनसे कम से कम ये पांच सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए...
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आप वॉलिंटयर क्यों नहीं गए बचाने?

राजस्‍थान के दौसा से आया गजेंद्र बुधवार को आम आदमी पार्टी की रैली में पहुंचा और लगभग 12.30 बजे एक पेड़ पर चढ़ गया। इस दौरान उसके हाथ में लंबा डंडा लगा हुआ एक झाड़ू था।

पेड़ पर चढ़ने के बाद वह लगभग एक घंटे बीस मिनट तक पेड़ पर रहा और नारे लगाता रहा। इस दौरान रैली में भाग लेने के लिए लगभग 3000 लोगों की भीड़ जंतर मंतर पर मौजूद थी लेकिन किसी ने गजेंद्र को बचाने या नीचे उतारने की कोशिश क्यों नहीं ‌की?

हालांकि आम आदमी पार्टी के नेता इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस पर यह आरोप लगाते रहे कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उनकी ओर से गजेंद्र को बचाने की कोई कोशिश नहीं की गई।

क्यों आगे नहीं बढें आप नेता

एएनआई के अनुसार गजेंद्र दिल्ली आने के बाद आप नेता और दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया से मिला था। जाहिर है आत्महत्या करने से पलहे ही आप के बड़े नेता उससे मिल चुके थे और उसे पहचानते भी थे।

ऐसे में जब वह पेड़ पर चढ़ा और लगातार अपनी ओर ध्यान खींचने का प्रयास करता रहा उस समय दिल्ली के मुख्यमंत्री से लेकर डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया भी मंच पर मौजूद थे और इस पूरे घटनाक्रम को देख रहे थो।

यह सवाल पैदा होना लाजिमी है कि क्यों मंच पर मौजूद आप का कोई भी बड़ा नेता उस पेड़ के पास नहीं गया? संभव है कि अगर आप के किसी बड़े नेता ने पेड़ के नीचे जाकर भी गजेंद्र को समझाने की कोशिश की होती तो शायद इस घटना को होने से रोका जा सकता था।

दिल्ली पुलिस ने क्यों नहीं उठाया कोई कदम

बुधवार को जंतर मंतर पर आयोजित आप की रैली के दौरान दिल्ली के गेस्ट टीचर्स भी वहां बड़ी संख्या में मौजूद थे। ये सभी आप की सरकार का विरोध कर रहे थे। ध्यान देने वाली बात ये है कि गजेंद्र जिस पेड़ पर चढ़ा हुआ था उसी पेड़ के ठीक नीचे गेस्ट टीचर्स जमा थे।

रैली में आप समर्थकों और गेस्ट टीचर्स के बीच किसी तरह की झड़प न हो इसके लिए दिल्ली पुलिस के जवान बड़ी संख्या में उस पेड़ के नीचे ही मौजूद थे। बताया ये भी जा रहा है जब गजेंद्र पेड़ पर चढ़ा तो लोग नीचे से तालियां बजा कर उसे उत्तेजित भी कर रहे थे।

ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतनी बड़ी घटना को होने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने कोई कदम क्यों नहीं उठाया? सवाल यह भी उठता है कि आखिर आत्महत्या के बाद भी दिल्ली पुलिस ने उसे अस्पताल पहुंचाने की कोशिश क्यों नहीं की?

आत्महत्या के बाद भी क्यों जारी रहा भाषण

गजेंद्र ने बुधवार को दोपहर लगभग 1.30 से 1.50 बजे के बीच फांसी लगाई जबकि जंतर मंतर पर आम आदमी पार्टी की रैली उसके बाद भी जारी रही। गजेंद्र को अस्पताल ले जाते वक्त दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल मंच पर ही मौजूद थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जिस वक्त गजेंद्र को पेड़ से उतारा गया उस वक्त उसकी जबान बाहर निकली हुई थी और गजेंद्र की स्थिती इतनी खराब थी कि उसके बचने की कोई संभावना नहीं दिख रही थी।

चौंकाने वाली बात है कि क्या केजरीवाल या मंच पर मौजूद किसी भी नेता तक यह संदेश नहीं पहुंचा कि उसकी हालत बेहद नाजुक है और बचने की संभावना ना के बराबर है।

ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्यों आप के मंच से नेताओं का भाषण रुकना तो दूर किसी भी नेता ने तुरंत ही अस्पताल जा कर गजेंद्र की हालत जानने या उसके परिवार तक पहुंचने की कोशिश नहीं की?
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ऐसी दुर्घटना से बचने के उपाए थे?

गजेंद्र ने देश की राजधानी मे उस जगह आत्महत्या की जो लगभग पूरे साल राजनीतिक गतिविधियों और धरना व विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बना रहता है। यह ऐसी जगह है जहां कोई भी असंभावित परिस्थिती कभी भी पैदा हो सकती है।

ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि दिल्ली पुलिस ने गजेंद्र को बचाने और उसे अस्पताल पहुंचाने से पहले मौके पर ऐसी परिस्थिती से बचने के क्या उपाय कर रखे थे।

पुलिस भले ही यह आरोप लगाए कि आप कार्यकर्ताओं ने उनके काम में बाधा पहुंचाई लेकिन ऐसे मौकों पर रैली में आए लोगों का उत्तेजित होना और भावनात्मक होकर व्यवहार करना कोई अनोखी बात नहीं है। फिर दिल्ली पुलिस ने इस परिस्थिती से निबटने के लिए पहले से कोई इंतजाम क्यों नहीं कर रखा था?
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