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कोरोनिल के प्रचार के संबंध में नहीं दर्ज की जा सकती एफआईआर: दिल्ली पुलिस 

Wed, 15 Jul 2020 09:26 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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कोरोनिल - फोटो : सोशल मीडिया
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बाबा रामदेव की कंपनी पातंजलि आयुर्वेद लिमिटेड की दवा कोरोनिल के प्रचार के खिलाफ दायर याचिका पर एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती। यह दलील दिल्ली पुलिस ने एक्शन टेकन रिपोर्ट अदालत में दाखिल करते हुए बुधवार को दी। 

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दवा के प्रचार के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस उत्तराखंड में हुई थी इस कारण यह मामला और घटना दिल्ली पुलिस के क्षेत्राधिकार में नहीं आता। पटियाला हाउस अदालत के सीएमएम सुमित आनंद के समक्ष थाना वसंत विहार पुलिस ने इस मामले में बुधवार को एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल की। 

सब इंस्पेक्टर पंकज कुमार ने कहा कि याचिका में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोरोनिल का प्रचार कोविड-19 की दवा बताकर करने का आरोप लगाया गया है, लेकिन यह प्रेस कॉन्फ्रेंस हरिद्वार, उत्तराखंड में हुई थी। इसलिए इस मामले में वंसत विहार थाना पुलिस केस दर्ज नहीं कर सकती। 
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पुलिस अधिकारी ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने जिस आधार पर एफआईआर नहीं करने का आरोप लगाया है, उस आधार पर ज्योति नगर, जयपुर में पहले से धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज है। सब इंस्पेक्टर ने कोर्ट को बताया कि आयुष मंत्रालय ने पतंजलि कंपनी के उत्पाद कोरोनिल को बतौर प्रतिरक्षा बढ़ाने वाली दवा के रूप में बेचने की अनुमति दे दी है। 

हालांकि उन्होंने कहा कि अगर आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया जाता है और कोरोनिल को कोविड-19 की दवा के रूप में बेचा जाता है, तो शिकायतकर्ता इस संबंध में पुलिस को शिकायत दे सकते हैं, उस आधार पर पुलिस एफआईआर करने में सक्षम होगी।
 

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यह याचिका वकील तुषार आनंद की ओर से दायर की गई है। उन्होंने दावा किया है कि बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को केवल प्रतिरक्षा बढ़ाने की दवाई बनाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन उन्होंने कोरोनिल को मार्केट में आने से पहले ही यह दावा किया कि इससे कोविड-19 महामारी का इलाज होगा।

याची ने आरोप लगाया कि कोरोनिल को लेकर झूठे दावों में कहा गया कि यह महज सात दिनों में कोरोना संक्रमण को समाप्त कर देगी, लेकिन बाद में सरकार द्वारा करवाए गए क्लीनिकल ट्रायल में यह दवा सफल नहीं हुई। उन्होंने बाबा रामदेव और पातंजलि आयुर्वेद लिमिटेड समेत एफआईआर दर्ज का निर्देश देने की मांग की थी।
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