यह याचिका वकील तुषार आनंद की ओर से दायर की गई है। उन्होंने दावा किया है कि बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को केवल प्रतिरक्षा बढ़ाने की दवाई बनाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन उन्होंने कोरोनिल को मार्केट में आने से पहले ही यह दावा किया कि इससे कोविड-19 महामारी का इलाज होगा।
याची ने आरोप लगाया कि कोरोनिल को लेकर झूठे दावों में कहा गया कि यह महज सात दिनों में कोरोना संक्रमण को समाप्त कर देगी, लेकिन बाद में सरकार द्वारा करवाए गए क्लीनिकल ट्रायल में यह दवा सफल नहीं हुई। उन्होंने बाबा रामदेव और पातंजलि आयुर्वेद लिमिटेड समेत एफआईआर दर्ज का निर्देश देने की मांग की थी।