दो दिन पहले 2 करोड़ रुपये की कीमत की किताबें पकड़ी गईं थीं
गाजियाबाद में अवैध प्रिंटिंग मशीनें लगाकर होती थी किताबों की छपाई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने एनसीईआरटी की नकली किताबों की छपाई और सप्लाई में शामिल एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से कुल 44,862 नकली एनसीईआरटी किताबें, दो ऑफसेट प्रिंटिंग प्रेस मशीनें, पेपर रील, प्रिंटिंग इंक और एल्युमीनियम प्रिंटिंग प्लेट्स आदि सामान बरामद किया है। पुस्तकों की कीमत बाजार में 2 करोड़ रुपये बताई जा रही है। अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त संजीव कुमार यादव ने बताया कि इंस्पेक्टर केके शर्मा ने नकली/जाली उत्पादों के निर्माण और बिक्री के खिलाफ अपनी लगातार मुहिम जारी रखे थे।
इंस्पेक्टर केके शर्मा ने 10 नवंबर, 25 को दिल्ली के दरियागंज में एक गोदाम 12,755 नकली/पायरेटेड एनसीईआरटी की किताबें बरामद की थीं। इस मामले की चल रही जांच में 16 जनवरी को अपराध शाखा की टीम ने गांव जावली, लोनी, गाजियाबाद के इलाके में छापा मारा और यहां से आरोपी नॉर्थ छज्जूपुर, शाहदरा, दिल्ली निवासी सुमित (35) निवासी को गिरफ्तार किया गया। जांच में पता चला कि आरोपी रिस्टल रोड पुलिया, गांव जावली, लोनी, गाजियाबाद के पास स्थित एक अवैध प्रिंटिंग फैक्टरी चला रहा था। इस फैक्टरी को पायरेटेड एनसीईआरटी की भारी मात्रा में किताबें मिलीं, जिनकी सप्लाई पहले गिरफ्तार आरोपी कनिष्क और विनोद जैन को की जा रही थी। यहां से 32,755 नकली/पायरेटेड किताबें बरामद की गईं। इसके बाद दोनों अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। सुमित का कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। प्रीत विहार, दिल्ली निवासी विनोद जैन (65 ) पहले भी नकली/पायरेटेड किताबों के ऐसे ही एक मामले में शामिल रहा है। उसके खिलाफ कॉपीराइट एक्ट के तहत अपराध शाखा के थाने में मामला दर्ज है। कनिष्क (32) का पहले कोई रिकॉर्ड नहीं है।