साल 2001 से सीरियल किलर्स का ये गैंग वारदातों को अंजाम दे रहा था। टैक्सी चालकों के गायब होने के दर्जनों मामले दिल्ली में दर्ज हैं। पुलिस को शक है कि इस गिरोह का दर्जनों टैक्सी चालकों के गायब होने में हाथ हो, इन्होंने उस चालकों की भी हत्या कर दी हो। जांच में सामने आया है कि ये लोग पहले दिल्ली से रेंट पर गाड़िया बुक करते थे, उसके बाद उसे उत्तराखंड ले जाते थे। उसे नशीला पदार्थ देकर बेहोश कर दिया जाता था।
अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम उपायुक्त आदित्य गौतम ने बताया आरोपी अजय लांबा के खिलाफ दिल्ली, हल्द्वानी, अल्मोड़ा में अगवा कर हत्या के चार मामले दर्ज हैं। दिल्ली में वर्ष 2021 में इसे 100 किलो गांजे के साथ गिरफ्तार किया गया था। एक वर्ष जेल में रहने के बाद उसने पिछले साल ओडिशा में अपने साथियों के साथ मिलकर ज्वेलरी की दुकान में डकैती डाली थी। पुलिस की टीम को सूचना मिली कि आरोपी अजय इंडिया गेट के पास आने वाला है। वह अपने एनडीपीएस एक्ट के पुराने केस में शामिल होने के लिए कोर्ट आ रहा था। पुलिस ने उसे दबोच लिया।
छानबीन के दौरान टीम को पता चला है कि आरोपी बेहद कम उम्र में आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो गया था। विकासपुरी पुलिस थाने की पुलिस ने उसे बंशी के नाम से बीसी घोषित कर दिया गया था। इसके बाद उसने अपना नाम बदलकर अजय लांबा रख दिया। इसके बाद वह यूपी के बरेली चला गया। वहां, धीरेंद्र, धीरज और दिलीप नेगी के साथ मिलकर उसने टैक्सी किराए पर लेकर चालकों की हत्या कर लूटे गए वाहनों को नेपाल में बेचना शुरू कर दिया। अजय लांबा 1999 से 2001 के बीच दिल्ली, हल्द्वानी, अल्मोड़ा और चंपावत में इसी तरह के चार मामलों में शामिल रहा। सभी मामलों में वह भगोड़ा घोषित था। उसके खिलाफ 1990 से लेकर अब तक चोरी से लेकर अवैध हथियार रखने तक के कई मामले दर्ज हैं। पुलिस पकड़े गए आरोपी से पूछताछ कर पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।