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दिल्ली पुलिस ने छह महीने में 2431 अवैध हथियार तस्करों को दबोचा, 1702 अवैध हथियार किए बरामद 

Sun, 13 Dec 2020 10:11 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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delhi police - फोटो : PTI
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दिल्ली पुलिस पिछले छह महीने में अवैध हथियार तस्करों पर नकेल कसने में कामयाब रही है। दिल्ली पुलिस ने छह महीने में अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले 2431 अवैध हथियार तस्करों को दबोचा। अवैध हथियार तस्करों के खिलाफ कुल 2040 मामले दर्ज किए गए हैं। दिल्ली पुलिस ने अवैध हथियारों की तस्करी को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया हुआ था।

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दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता डा. ईश सिंघल ने बताया कि दिल्ली में पैर जमाने की कोशिश कर रहे अवैध हथियार तस्करों को पकडने में काफी सफलता मिली है। एनएस श्रीवास्तव के पुलिस आयुक्त बनने के बाद अवैध हथियार तस्करों को पकड़ने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर उनके खिलाफ अभियान शुरू किया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल व अपराध शाखा समेत सभी यूनिटों ने अपने मुखबीर तंत्र को सक्रिय किया। दिल्ली पुलिस ने एक जून से लेकर 30 नवंबर तक की अवधि में 2431 अवैध हथियार तस्करों को दबोचा। इनके खिलाफ 2040 मामले दर्ज किए गए। 

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि अवैध हथियार तस्करों के कब्जे से कुल 1702 अवैध हथियार बरामद किए गए। इनमें 1493 कट्टे, 195 रिवाल्वर/ पिस्टल और 14 राइफल बरामद की गईं। इसके अलावा अवैध हथियार तस्करों के कब्जे से 3198 कारतूस भी बरामद किए गए। उनका कहना है कि दिल्ली पुलिस का अवैध हथियार तस्करों के खिलाफ अभियान अभी जारी है।
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दिल्ली-एनसीआर में मध्यप्रदेश से आते हैं अवैध हथियार:
दिल्ली पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस समय दिल्ली-एनसीआर में सबसे ज्यादा अवैध हथियार मध्यप्रदेश से आते हैं। मध्यप्रदेश से इस समय आ रहे अवैध हथियार की क्वालिटी अन्य जगहों से अच्छी है और सस्ते भी होते हैं। एक समय अवैध हथियार का गढ़ माना जाने वाला मुंगेर, बिहार से अब हथियार कम आ रहे हैं। यहां पुलिस की सख्ताई बढ़ गई है। मेरठ व अलीगढ़ समेत पश्चिमी उत्तरप्रदेश से भी दिल्ली में अवैध हथियार सप्लाई होते हैं।

दिल्ली पुलिस नए कानून के तहत मामला दर्ज कर रही है:
दिल्ली पुलिस अवैध हथियार तस्करों के खिलाफ शस्त्र अधिनियम संशोधन-2019 के तहत मामला दर्ज कर रही है। नए कानून के तहत कम से कम दस वर्ष की सजा व आर्थिक जुर्माने का प्रावधान है। पहले जो कानून था उसमें कुछ ही वर्षों की सजा थी और आरोपी को जल्द ही जमानत मिल जाती थी। 

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