फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली : बेड और ऑक्सीजन के बाद अब प्लाज्मा ने बढ़ाई टेंशन

Thu, 06 May 2021 12:28 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

  • - दिल्ली के अस्पतालों में 25 दिन बाद भी हालात नहीं बदले
  • - आईसीयू बेड दिल्ली-एनसीआर में मिलना संभव नहीं
  • - प्लाज्मा के लिए दाता भी अस्पताल जाने से घबरा रहे
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजधानी में मरीजों की आफत कम नहीं हो रही है। अब तक अस्पतालों में बिस्तरों की मारामारी चल रही है और अब ऑक्सीजन व अन्य संसाधनों के अलावा प्लाज्मा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। आईसीएमआर के अनुसार, कोरोना वायरस के उपचार में प्लाज्मा थेरेपी का बहुत अधिक असर नहीं मिला है। इससे किसी मरीज की मौत को नहीं रोका जा सकता है। इसके बाद भी दिल्ली-एनसीआर में डॉक्टर प्लाज्मा थेरेपी के लिए तीमारदारों को सलाह दे रहे हैं। 

विज्ञापन


हालात ये हैं कि प्लाज्मादाता भी लोगों को नहीं मिल पा रहे हैं, जिसकी वजह से तीमारदारों की मुसीबत फिर से बन गई है। रोहिणी निवासी मनीष यादव का कहना है कि पहले मरीज को भर्ती कराओ, फिर ऑक्सीजन, रेमडेसिविर, टोसिलिजुमैब, फेविपिराविर जैसी दवाओं के लिए धक्के खाओ। यह सब उपलब्ध कराने के बाद भी मरीज पर असर नहीं होता तो डॉक्टर प्लाज्मादाता को तलाशने के लिए कहते हैं। ऐसे में तीमारदारों की मुसीबत सबसे अधिक है। वह भी तब जब उनके संक्रमित होने का खतरा भी बरकरार रहता है।

दिल्ली के आईएलबीएस अस्पताल में सरकार ने देश का पहला प्लाज्मा बैंक तैयार किया था, लेकिन यहां से प्लाज्मा तभी दिया जाएगा जब आपके पास कोई दाता हो। प्लाज्मा वही व्यक्ति दे सकता है जो 14 दिन पहले निगेटिव हुआ हो। या फिर पिछले तीन महीने के दौरान संक्रमित होकर स्वस्थ हुआ हो। ऐसे व्यक्तियों को तलाशने के बाद उन्हें अस्पताल में आकर प्लाज्मा दान करने की अपील की जा रही है, लेकिन समस्या यह है कि अस्पतालों में जिस तरह की स्थिति देखने को मिल रही है उसकी वजह से लोग अस्पताल जाने से भी घबरा रहे हैं।
विज्ञापन


पिछले माह 13 अप्रैल से राजधानी के अस्पतालों में बिस्तरों की कमी है। प्राइवेट अस्पतालों ने हर दिन बेड खाली होने की जानकारी देना तक सरकार को बंद किया हुआ है। वहीं, सरकार को जो नंबर अस्पतालों ने दिए हैं वह भी फर्जी हैं, जिन पर लोगों को मदद नहीं मिल पा रही है। रेमडेसिविर सहित अन्य तमाम उपकरण और दवाओं के लिए भी लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। फिलहाल हालात दिल्ली के सरकारी और प्राइवेट दोनों ही तरह के अस्पतालों में देखने को मिल रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें