दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर बुधवार को कालकाजी भूहीन कैंप की 344 अयोग्य झुग्गियों को तोड़ दिया गया। डीडीए ने कहा कि यह कदम दिल्ली को झुग्गी-मुक्त बनाने की दिशा में उठाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इससे पहले झुग्गी पुनर्वास योजना के तहत 1862 पात्र परिवारों को आधुनिक सुविधाओं वाले फ्लैट दिए गए हैं।
डीडीए के मुताबिक बुधवार को 344 झुग्गियों को खाली कराने के बाद तोड़ा गया। इनके खिलाफ कोई स्टे ऑर्डर नहीं था। यह जमीन पांच एकड़ में फैली है, जहां नवजीवन और जवाहर कैंप के 4500 झुग्गीवासियों के लिए पुनर्वास प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। पिछले ढाई साल से अतिक्रमण के कारण काम रुका था। अब कोर्ट के आदेश से हुई कार्रवाई के कारण प्रोजेक्ट पर काम शुरू होगा।
डीडीए ने बताया कि कालकाजी के भूहीन कैंप में इन-सिटू स्लम रिहैबिलिटेशन प्रोजेक्ट के तहत 1862 पात्र परिवारों को नवंबर 2022 से मई 2023 के बीच कालकाजी एक्सटेंशन में नए फ्लैट दिए गए। ये फ्लैट 3.068 हेक्टेयर डीडीए की जमीन पर 345 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए हैं। प्रत्येक फ्लैट की कीमत 11.41 लाख रुपये है। पात्र परिवारों को इन्हें सिर्फ 1.12 लाख रुपये में दिए गए। 25 वर्ग मीटर के फ्लैट्स में एक बेडरूम, लिविंग रूम, किचन, बाथरूम और बालकनी है, साथ ही सभी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं।
सर्वे के बाद अयोग्य घोषित हुईं झुग्गियां
डीडीए के मुताबिक पात्रता के लिए 2015 की दिल्ली सरकार की नीति लागू की गई, जिसमें 2012-2015 के वोटर लिस्ट में नाम, पासपोर्ट, बिजली बिल जैसे दस्तावेज और जिस साल सर्वे हुआ, उस साल की वोटर लिस्ट में नाम होना जरूरी था। जो लोग ऊपरी मंजिल पर बिना अलग राशन कार्ड के रहते थे, या जिनकी झुग्गी दुकान के रूप में थी, उन्हें अयोग्य माना गया।
कोर्ट के आदेश से योग्य लोगों को मिले फ्लैट
अयोग्य लोगों ने डीडीए के खिलाफ कोर्ट में अपील की, जिसमें से बाद में 34 परिवारों को फ्लैट मिले। 435 लोगों ने हाईकोर्ट में 55 रिट याचिकाएं दायर कीं, लेकिन कोर्ट ने ज्यादातर को खारिज कर दिया। कोर्ट ने एक मामले में वैकल्पिक फ्लैट देने और 26 मामलों की छह हफ्ते में समीक्षा करने के आदेश दिए थे। डीडीए ने एक परिवार को फ्लैट दे दिया और बाकी मामलों की जांच शुरू कर दी है।
फिर साबित हुआ भाजपा की कथनी-करनी में अंतर : आतिशी
कालकाजी विधानसभा स्थित भूमिहीन कैंप की झुग्गियों पर बुधवार सुबह बुलडोजर चलाए जाने पर आम आदमी पार्टी ने कड़ा विरोध किया है। स्थानीय विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने घटनास्थल पर पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और कहा कि फिर साबित हुआ कि भाजपा कथनी और करनी में अंतर है। नहीं उजाड़ने की बात करने वाली मुख्यमंत्री ने झुग्गी तुड़वा दी।
आतिशी के अनुसार, सिर्फ 100 दिन में ही भाजपा सरकार ने गरीबों पर तीसरा वार किया। पहले बिजली महंगी की, फिर शिक्षा और अब आशियाने छीन लिए। उन्होंने बताया कि भूमिहीन कैंप मामले में बुधवार सुबह 11 बजे कोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन उससे पहले ही सुबह पांच बजे झुग्गियां तोड़ दी गईं।
आप नेता ने कहा कि डीडीए, दिल्ली सरकार और डूसिब ने खुद कोर्ट में खड़े होकर कहा कि गरीबों को घर नहीं दिए जाएंगे। यह साफ दर्शाता है कि भाजपा गरीब विरोधी पार्टी है और जानबूझकर झुग्गीवालों को दिल्ली से खदेड़ना चाहती है। आतिशी ने सवाल उठाया कि क्या भाजपा दिल्ली से यूपी-बिहार के लोगों को भगाकर वहीं वोट मांगने जाना चाहती है। उन्होंने कहा कि एक ओर भाजपा बिहार में चुनाव जीतना चाहती है और इधर दिल्ली में उन्हीं लोगों के घर तोड़ रही है।