टीकाकरण: कोरोना की वैक्सीन लगवाती महिला
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विदेश यात्रा करने वाले युवाओं के लिए मंदिर मार्ग स्थित नवयुग स्कूल में चल रहे अंतरराष्ट्रीय यूथ टीकाकरण केंद्र पर युवा इन दिनों कोरोना का टीका लगवाने से वंचित हो रहे हैं। प्रतिदिन तड़के चार बजे से ही युवाओं की कतार लगना शुरू हो जाती है, लेकिन कतार में कुल लगने वाले युवाओं में से केवल आधों को ही टीका लग पाता है। यही नहीं गर्मी में औसतन तीन घंटे के इंतजार के बाद एक युवा को डोज लग पा रही है।
सरकार ने विदेश यात्रा करने वाले युवाओं के लिए मंदिर मार्ग स्थित सरकारी स्कूल में टीकाकरण की व्यवस्था की है। यहां पहुंचने से पहले युवक कई दिन पहले ऑनलाइन पंजीकरण कराकर पहुंच रहे हैं। इसके बाद भी यहां धूप में घंटों इंतजार खत्म नहीं हो रहा। मौजपुर से पहुंचे कार्तिक सचदेवा ने कहा कि उन्हें इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए अमेरिका जाना है। दाखिला मिशिगन यूनिवर्सिटी में हो गया है और अगले माह तक का समय दिया गया है।
ऐसे में कई दिन से टीके के लिए प्रयास कर रहे हैं। तड़के चार बजे लाइन में लगने के बाद भी दोपहर 12 बजे तक नंबर आया। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक समय दस्तावेज के सत्यापन में लग रहा है। ऐसे में सरकार को विदेश यात्रा करने वाले युवाओं की सुविधा को देखते हुए इसकी संख्या भी बढ़ानी चाहिए।
नजफगढ़ से पहुंची पारूल डबास ने कहा कि वह सुबह नौ बजे केंद्र पहुंच गई थी, लेकिन लंबी लाइन के कारण उन्हें दो घंटे तक केंद्र के बाहर धूप में खड़ा होना पड़ा। इस वजह से हालत खराब हो गई। उन्होंने कहा कि तबियत बिगड़ने पर टीकाकरण केंद्र पर स्वास्थ्यकर्मियों ने एक घंटा आराम कर टीका लगवाने के लिए कहा। इस वजह से केंद्र पर कुल पांच से छह घंटे का समय लग गया। यदि सरकार टीकाकरण केंद्रों की संख्या बढ़ा दे तो युवाओं को इस तरह की परेशानी नहीं होगी।
एनसीआर से भी पहुंच रहे
टीकाकरण केंद्र पर केवल दिल्ली के ही नहीं बल्कि एनसीआर के युवा भी पहुंच रहे हैं। युवाओं का कहना है कि एनसीआर के अधिक युवा यहां पहुंचकर टीका लगवा लेते हैं जबकि दिल्ली के युवाओं को मायूसी के साथ लौटना पड़ता है। यही वजह है कि कुल 400-500 में से केवल 200 युवाओं को ही टीका लगता है। युवाओं ने कहा कि दिल्ली में केवल दिल्ली के युवाओं को ही टीका लगना चाहिए। इससे लंबी कतारों से बचा जा सकता है।
सुबह सात बजे ही केंद्र पर पहुंच गया था। इसके बाद पासपोर्ट समेत अन्य दस्तावेज के सत्यापन में समय लग गया। दिनभर भूखे रहने के बाद दोपहर 12 बजे तक नंबर आया। यदि दिल्ली में ऐसे एक-दो केंद्र और खुल जाएं तो युवाओं को बहुत ही सहूलियत हो जाएगी।
-आयुष, रोहिणी
मेरा भाई सुबह से ही केंद्र के अंदर मौजूद था। साथ में आने वाले लोगों के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं दिखी। बाहर धूप में इंतजार करना पड़ता है। तीन घंटे के बाद भी भाई ने बोला कि दो घंटे का समय और लगेगा।
-पूजा, लक्ष्मी नगर