जुर्माना... हिसाब-किताब
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बैठक के बाद निर्णय लिया गया कि पार्किंग दरों और बसों के अंदर जाने से बाहर आने तक के समय व्यवस्थित किया जाए। इसके तहत केवल फास्टैग स्टिकर वाली बसों की प्रवेश की अनुमति का फैसला लिया गया। इसकी मदद से वाहन मानव हस्तक्षेप के बिना जल्दी अंदर-बाहर जा सकेंगे। इस फैसले के बाद टर्मिनल में प्रति दिन 1700 की जगह तीन हजार बसें आ सकेंगी। वहीं निजी बसों को अधिक शुल्क से राहत मिलेगी। वहीं बसों की संख्या ज्यादा आने से परिवहन विभाग का राजस्व भी बढ़ेगा।
फास्टैग लगाना जरूरी
टर्मिनल के अंदर बसों को प्रवेश देने के लिए फास्टैग को अनिवार्य कर दिया गया है। इसकी मदद से बसें जल्द अंदर और बाहर जा सकेगी। पार्किंग शुल्क को वसूलने में भी आसानी होगी। साथ ही बसों के अंदर-बाहर जाने पर निगरानी भी रखी जा सकेगी। ऑनलाइन माध्यम से लोगों को भी आसानी होगी। अधिकारी की माने तो कश्मीरी गेट, आनंद विहार, सराय काले खां टर्मिनल में बिना फास्टैग के कोई अंदर-बाहर नहीं कर पाएगा।
एलजी कर रहे हैं निगरानी
परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत की अध्यक्षता में हुई बैठक में परिवहन विभाग, पुलिस सहित अन्य उपस्थिति रहे। बैठक के बाद से एलजी पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी कर रहे हैं। अपने दौरे के दौरान एलजी ने आईएसबीटी में खराब होते बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को चिंता जाहिर की थी। इस टर्मिनल से रोजाना करीब तीन हजार बसों को सेवाएं मिलती है। उन्होंने परिवहन विभाग को टर्मिनल के पूर्ण बदलाव और अंतरराज्यीय बसों के टर्नअराउंड समय को मौजूदा 45-60 मिनट से घटाकर 30 मिनट करने का निर्देश दिया था।
सड़कों पर जाम की समस्या होगी दूर
नई अधिसूचना के साथ, बसों का कम टर्नअराउंड समय, तेज संचलन और बेहतर संचालन हासिल किया जाएगा। इससे रिंग रोड और आईएसबीटी से तीस हजारी की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर भीड़भाड़ कम होगी और रिंग रोड के अलावा सिविल लाइंस, तीस हजारी, सेंट स्टीफंस अस्पताल, सदर बाजार, पुल बंगश, सब्जी मंडी और आजाद मार्केट सहित मध्य दिल्ली के बड़े हिस्से में यातायात की समस्या दूर होगी।