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Delhi : नशा और अपराध के दलदल में फंसे किशोरों को बचाने की मुहिम, 80 किशोरों को मुख्य धारा में लाने का प्रयास

Mon, 09 Sep 2024 05:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली

सार

इसके लिए पुलिस ने ''समग्र’ की शुरूआत की है। पुलिस ने लाडली समेत कई एनजीओ, इबहास, डिप्रेशन से उबारने के लिए काउंसलर, डाक्टर, थियेटर समूह व स्किल पार्टनर्स को साथ जोड़ा है। कार्यक्रम की शुरूआत में ही गलत रास्ते पर चल रहे 80 किशोरों को पुलिस ने अपने कार्यक्रम से जोड़ा है।
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मुहिम की शुरुआत... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सातवी से नवीं के बाद पढ़ाई छोड़कर नशा व अपराध का रास्ता पकड़ने वाले युवा एवं किशोरों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने की मुहिम शुरू हो गई है। इसके लिए पुलिस ने किशोर सशक्तिकरण और परिवर्तन कार्यक्रम ''समग्र’ की शुरूआत की है। पुलिस ने लाडली समेत कई एनजीओ, इबहास, डिप्रेशन से उबारने के लिए काउंसलर, डाक्टर, थियेटर समूह व स्किल पार्टनर्स को साथ जोड़ा है। कार्यक्रम की शुरूआत में ही गलत रास्ते पर चल रहे 80 किशोरों को पुलिस ने अपने कार्यक्रम से जोड़ा है।

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दक्षिणी रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त एसके जैन ने बताया कि फरवरी महीने से ही उन्होंने इस मुद्दे पर होमवर्क करना शुरू कर दिया गया था कि नशा व अपराध के दलदल में फंसे किशोरों और युवाओं को समाज की मुख्य धारा से कैसे जोड़ा जाए। इसके लिए लाड़ली व अन्य एनजीओ को लेकर समग्र कार्यक्रम तैयार कर शुरू किया गया है। कार्यक्रम में ऐसे किशोर को जोड़कर उनके अंतरमन की कशमकश व गुस्से के कारणों पर मंथन किया गया। जिस वजह से वह नशा या अपराध की दुनिया की ओर भाग रहे थे।

कार्यक्रम में बच्चों के इमोनशन को बाहर निकाला जाएगा। इसके बाद उनकी सही क्षमता को देखते हुए स्किल पार्टनर से जोड़ा जाएगा। कार्यक्रम में गलत रास्तों पर जाने के कारणों, कैसे सही रास्ते पर लाया और आगे सही रास्ते पर चले इसके लिए रोजगार की व्यवस्था की जाएगी। एनजीओ, अस्पताल, सलाहकार, स्किल पार्टनर से टाईअप, थियेटर फैकल्टी, एक्सपर्ट को साथ जोड़ा गया है। इससे किशोर के सोचने के तरीके को बदला जाएगा।
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जेजे कलस्टर व अन्य अनाधिकृत कॉलोनियों में शुरू किया अभियान
दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त अंकित चौहान ने बताया कि शुरूआत में इस कार्यक्रम को जेजे कलस्टर एरिया व अनाधिकृत कॉलोनियों आदि में शुरू किया गया है। अभी संगम विहार, तिगड़ी व नेबसराय थाना इलाके में शुरू किया गया है। यहां दो महीने तक किशोर को मूल्यांकन किया जाएगा। अभी अपराध करने वाले किशोर की जेजे रिपोर्ट ही देखी जाती है।

इनकी ली जा रही है सहायता
संयुक्त पुलिस आयुक्त ने बताया कि पुलिस अपने समग्र कार्यक्रम पर फरवरी से होमवर्क कर रही है। इसके बाद ये कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसे जल्द ही सभी जगह लागू किया जाएगा। इस मुहिम को सफल बनाने के लिए इन लोगों की सहायता ली जा रही है। इनमें एनजीओ, इबहास अस्पताल, काउंसलर, थियेटर, वर्कशॉप, मोटिवेशनल स्पीकर, स्किल पार्टनर, खेल एवं स्थानीय लोग शामिल हैं।

ये कारण करते हैं युवाओं को गुमराह

दिल्ली पुलिस सर्दन रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त एसके जैन ने बताया कि सदर्न रेंज ने जो समग्र कार्यक्रम शुरू किया है उसकी तैयारी में कुछ युवाओं को लेकर अध्ययन किया गया है। अध्ययन में ये देखा कि कई ऐसे कारण है जो युवाओं को नशा व अपराध की ओर जाते हैं।

  • परिवारिक माहौल-नशा, मारपीट करना व अन्य गलत बातें किशोर के अंतरमन में परिवार के माहौल से आती हैं
  • इन्हें देख-देखकर बच्चे के अंदर एक गुस्सा या गुबार भर जाता है
  • बुरी संगत में पड़कर पढ़ाई छोड़ देना
  • सोशल मीडिया पर ऊल-जलूल चीजें देखकर
  • समाजिक माहौल

इस तरह बनते हैं अपराधी

  • पढ़ाई छोड़कर आवारागर्दी
  • मजे के लिए नशा करना
  • नशे के साथियों के साथ ज्यादा वक्त बिताना
  • दोस्ती-दोस्ती में बन जाता है गिरोह
  • इलाके में अपने गिरोह के वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो जाती है
  • इसके परिणामस्वरूप युवा अपराध की दुनिया में कर जाते हैं प्रवेश

भाई से नाम जोडऩा शौक व क्रेज बन जाता है-
दिल्ली के बाहरी समेत कई इलाकों, हरियाणा व राजस्थान में कुछ जगहों पर ये देखने में आया है कि अपराध की दुनिया में उतर चुका युवा गैंगस्टर या गिरोह से नाम जोडऩे को शान समझते हैं। देश-विदेश में बैठे गैंगस्टर की इन युवाओं पर नजर रहती है। ये इस तरह के युवाओं को अच्छा रहना-सहना, खाना व हथियार दे देते हैं। भाई से नाम जुड़ते ही इस तरह के युवा खुद को शहंशाह समझने लगता है। फिर गैंगस्टरों द्वारा ही इन्हें धीरे-धीरे अपराधों के दलदल में फंसा दिया जाता है।

कार्यक्रम का उद्देश्य किशोर परिवर्तन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करना है, जो भावनात्मक कल्याण, शारीरिक स्वास्थ्य, कौशल विकास और समुदाय के एकीकरण पर ध्यान केंद्रित करता है।
-अंकित चौहान, पुलिस उपायुक्त दक्षिण जिला दिल्ली पुलिस

इस कार्यक्रम के तहत एक सुधारात्मक दृष्टिकोण पर जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य आकलन, परामर्श, व्यावसायिक प्रशिक्षण, जीवन कौशल कार्यशाला, मनोरंजन और सलाह आदि पर भी फोकस है।
-एसके जैन, संयुक्त पुलिस आयुक्त, दक्षिणी रेंज दिल्ली पुलिस

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