सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के कौशांबी इलाके में यातायात प्रबंधन की समस्या के निदान को लेकर एक कमेटी का गठन किया है। कमेटी में उत्तर प्रदेश और दिल्ली की वैधानिक अथॉरिटी के प्रतिनिधि होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उसके समक्ष यातायात प्रबंधन योजना पेश किया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा है कि ट्रैफिक समस्या का निदान तब तक संभव नहीं है जब तक संबंधित अथॉरिटी संयुक्त रूप से यातायात समस्या के प्रबंधन के लिए ठोस प्रयास करने के लिए सहमत नहीं हो जाते।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा गठित इस कमेटी में मेरठ के डिविजनल कमिश्नर, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के चैयरपर्सन, गाजियाबाद के डीएम, दिल्ली सरकार के यातायात सचिव, पूर्वी दिल्ली नगर निगम और अन्य संबंधित अथॉरिटी के अधिकारी भी इसमें होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गाजियाबाद के डीएम इस कमिटी के नोडल ऑफिसर होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को तीन हफ्ते में यातायात प्रबंधन योजना को पेश करने के लिए कहा है। पीठ ने कहा है कि गा?ियाबाद के डीएम कमेटी के नोडल अधिकारी होंगे।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है जिसमें यातायात प्रबंधन से लेकर पर्यावरण समस्या, प्रदूषण और कचरे का निपटारा आदि का मामला उठाया गया है। याचिका में अनुचित योजनाएं और विकास परियोजनाओं का सही तरह से अनुपालन का मसला उठाया गया है। याचिकाकर्ता के वकील ने इस इलाके के लोग को जोन वाली परेशानी का उल्लेख किया। उन्होंने उस इलाके में तिपहिया सहित अन्य वाहनों की बेतरतीब पार्किंग, पर्याप्त पार्किंग स्थल का अभाव, प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल आदि का मसला उठाया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस याचिकामें कई मुद्दे उठाए गए हैं लेकिन पहले हम यातायात प्रबंधन को देखेंगे। पीठ ने पाया कि पहले ये मामला एनजीटी के पास था। वहां अवैध पार्किंग. प्रदूषण. सड़क पर अतिक्त्रस्मण आदि का मसला था। ट्रिब्यूनल ने कमिटी का गठन भी किया था। पीठ ने कहा कि एनजीटी ने जो भी प्रयास किया है ?उस पर आगे काम होना चाहिए। पीठ ने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट से सामने लाया गया है और कहा गया है कि स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। यही वजह है कि हमने यह आदेश पारित किया है। अगली सुनवाई 14 अप्रैल को होगी।