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दिवाली से पहले गैस चैंबर बन सकता है दिल्ली-एनसीआर

Thu, 10 Oct 2019 03:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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file photo
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उत्तर भारत से मानसून की विदाई में हो रही देरी दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा पर बुरा असर डालने जा रही है। इस महीने के दूसरे पखवाड़े में हवा की गुणवत्ता में तेजी से गिरावट की आशंका है। महीना खत्म होते-होते हवा बेहद खराब स्तर पर पहुंच सकती है। 

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ऐसे में दिल्ली-एनसीआर के गैस चैंबर में तब्दील होने की आशंका है। प्रदूषकों का बड़ा हिस्सा पटाखेबाजी और पड़ोसी राज्यों में पुआल जलने से निकलने वाले धुएं का होगा। इसमें स्थानीय स्तर पर होने वाला प्रदूषण भी अहम रोल अदा करेगा।

सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) ने बुधवार को अगले 15 दिन के पूर्वानुमान में कहा है कि हर साल अमूमन एक सितंबर को मानसून विदा होना शुरू हो जाता है। इस साल यह एक महीने देरी से है। अगले कुछ दिन में इसकी विदाई होनी है। 
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सफर के मुताबिक, मानसून के जाने में हो रही देरी दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा के लिए अच्छा संकेत नहीं है। 15 अक्तूबर के बाद तापमान गिरेगा और मौसम सर्द होगा। वहीं, मानसून के लौटने के तुरंत बाद इस क्षेत्र में चक्रवातरोधी स्थितियां बनेंगी। इससे धरती की सतह पर चलने वाली हवाएं शांत रहेंगी।

सफर का कहना है कि दोनों का मिला-जुला असर खराब मौसमी दशाओं के तौर रहेगा। इससे वायु प्रदूषण के स्तर में तेजी से बढ़ोत्तरी होगी। इस दौरान पटाखेबाजी और पुआल जलाने के मामलों में भी बढ़ोत्तरी होने से हवा की गुणवत्ता बेहद खराब होगी। इससे दिल्ली-एनसीआर इस मौसम में पहली बार गैस चैंबर बनते दिखेंगे। हालांकि, दिल्ली में स्थानीय कारकों पर बंदिश लगाई जा सकी तो हालात बेहतर रह सकते हैं।

एक हफ्ते औसत रहेगी वायु गुणवत्ता
सफर का आकलन है कि अभी दिल्ली की तरफ आ रही पुरवा हवाओं की रफ्तार धीमी है। वहीं, उत्तर-पश्चिम भारत का मौसम सूखा है। इससे इस हफ्ते हवा की गुणवत्ता कमोबेश औसत दर्जे की ही रहेगी। वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से ऊपर नहीं जाएगा। 

हालांकि, पिछले एक हफ्ते से उत्तरी भारत में कहीं-कहीं पुआल जलाने के मामले सामने आए हैं। सेटेलाइट इमेज से पता चलता है कि पिछले 24 घंटों में इसमें इजाफा हुआ है। फिर भी, हवाएं अभी इतनी तेज नहीं हैं, जिससे वह प्रदूषकों को दिल्ली तक पहुंचा सकें।

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लेकिन इस बार रावण ने किया कम प्रदूषण

जागरूक लोगों ने इस बार रावण में पटाखे भरकर जलाने से खूब परहेज किया है। यह वजह है कि इस बार रावण ने प्रदूषण बहुत कम किया। रावण को जलाने के बाद लिए गए प्रदूषण के आंकड़ों पर नजर डालें तो पाएंगे कि पिछले 5 सालों में सबसे कम प्रदूषण इस बार रहा। पिछले साल दशहरे के बाद वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 326 था, जबकि इस बार वह घटकर महज 173 था। हालांकि, मंगलवार की तुलना में इसमें 61 अंकों की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।

सीपीसीबी के आंकड़े बताते हैं कि मंगलवार शाम 4 बजे से बुधवार शाम 4 बजे के बीच दिल्ली का एक्यूआई 173 पर रहा। हवा की गुणवत्ता औसत दर्जे पर रिकॉर्ड की गई। इससे पहले 2017 में दशहरे पर यह 196 था। 2015 में 292 पर खराब स्तर पर था। वहीं, 2018 में एक्यूआई 326 रहा, जो कि बेहद खराब स्तर है।

2016 में यह 292 पर रहा था। दूसरी तरफ, इस साल मंगलवार की तुलना में बुधवार को सूचकांक में 61 अंक की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। मंगलवार के 112 की तुलना में सूचकांक बुधवार को 173 पर पहुंच गया। फिर भी, गुणवत्ता औसत दर्जे की सीमा को पार नहीं कर सकी।

विशेषज्ञ बताते हैं कि दशहरे पर एक्यूआई पिछले सालों से बेहतर रहने का कारण मौसमी दशाएं हैं। इस बार बाहरी प्रदूषक दिल्ली नहीं पहुंच पा रहे हैं। हवा की रफ्तार इतनी धीमी है कि पड़ोसी राज्यों का असर दिल्ली पर नहीं पड़ा। वहीं, दिल्ली में इस बार पुतले के साथ पटाखेबाजी भी नहीं हुई। दोनों का मिला-जुला असर प्रदूषण के स्तर में कमी के तौर पर रहा। इस महीने के नौ दिन में कभी भी वायु गुणवत्ता खराब स्तर पर नहीं गई। 

मुख्यमंत्री ने दी बधाई
सभी रामलीला समितियों को दशहरे पर पटाखे कम जलाने के लिए तहेदिल से बधाई। समाज में कोई भी बदलाव लोगों के सहयोग के बिना संभव नहीं है। डेंगू और प्रदूषण दोनों को ही कम करने में हमें जो सफलता मिली है, वह सभी लोगों के सहयोग से ही संभव हुई है।
- अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री
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