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प्रदूषण-कोहरे का डबल अटैक: दिसंबर में दूसरी बार हुई इतनी खराब हवा, कई इलाकों में AQI आपात स्तर के करीब

Mon, 15 Dec 2025 08:42 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राजधानी को प्रदूषित हवा से अभी राहत मिलने के आसार नहीं है। दरअसल, प्रदूषण की जो स्थिति है, उससे कोई बड़ी मौसमी परिघटना ही दिल्ली को बचा सकती है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा ग्रेप की सर्वोच्च पाबंदियां लगाई जा चुकी हैं। इसके बावजूद प्रदूषण के स्तर में कमी नहीं आई है।
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दिल्ली में कोहरे और प्रदूषण का कहर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोहरे और ठंड ने दिल्ली के लोगों के लिए दमघोंटू हवा की आफत को और बढ़ा दिया है। राजधानी के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता आपात स्तर के करीब पहुंच गई है। हालात और बिगड़ने के संकेत हैं, क्योंकि फिलहाल तेज हवा या किसी बड़ी मौसमी राहत की संभावना नहीं दिख रही है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक (सीपीसीबी) के अनुसार, दिल्ली की हवा में मानकों से लगभग साढ़े चार गुना ज्यादा प्रदूषण मौजूद है। सोमवार को लगातार तीसरे दिन हवा गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई। सुबह की शुरुआत धुंध और कोहरे से हुई। वहीं, पूरे दिन आसमान में स्मॉग की मोटी चादर भी दिखाई दी। इसके चलते कई इलाकों में दृश्यता भी बेहद कम रही। ऐसे में जहरीली गैस से बचने के लिए लोगों ने एन95 मास्क का सहारा लेते नजर आए। साथ ही, लोगों को आंख में जलन व सांस के मरीजों को परेशानी हुई। 

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एनसीआर में ग्रेटर नोएडा सबसे प्रदूषित
इस दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 427 दर्ज किया गया। यह हवा की गंभीर श्रेणी है। इसमें रविवार की तुलना में 34 सूचकांक की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, एनसीआर में ग्रेटर नोएडा की हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही। यहां एक्यूआई 447 दर्ज किया गया, यह हवा की गंभीर श्रेणी है। वहीं, गाजियाबाद में 444, नोएडा में 437 और गुरुग्राम में 345 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसके अलावा, फरीदाबाद की हवा सबसे साफ रही। यहां सूचकांक 211 दर्ज किया गया। यह हवा की खराब श्रेणी है।

तीन दिन बेहद खराब रहेगी हवा
दिल्ली में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए निर्णय सहायता प्रणाली के अनुसार, वाहन से होने वाला प्रदूषण 13.07 फीसदी रहा। इसके अलावा पेरिफेरल उद्योग से 6.48, आवासीय इलाकों से 3.21 और निर्माण गतिविधियों से 1.73 फीसदी की भागीदारी रही। सीपीसीबी के अनुसार, सोमवार को हवा उत्तर पश्चिमी दिशा से 12 किलोमीटर प्रतिघंटे के गति से चली। वहीं, अनुमानित अधिकतम मिश्रण गहराई 1000 मीटर रही। इसके अलावा, वेंटिलेशन इंडेक्स 6000 मीटर प्रति वर्ग सेकंड रहा। दूसरी ओर, दोपहर पांच बजे हवा में पीएम10 की मात्रा 373 और पीएम2.5 की मात्रा 250.6 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का पूर्वानुमान है कि मंगलवार से बृहस्पतिवार के बीच में हवा के बेहद खराब श्रेणी में पहुंचने की आशंका है। इसके चलते सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। साथ ही, लोगों को आंखों में जलन, खांसी, खुजली, सिर दर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, कई इलाकों में गंभीर और बेहद खराब श्रेणी में हवा दर्ज की गई।

दृश्यता रही कम
दिल्ली के दोनों एयरपोर्ट, सफदरजंग और पालम पर घने कोहरे के कारण सोमवार को विजिबिलिटी कम होने से उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ। सफदरजंग एयरपोर्ट पर रात 1:30 बजे से सुबह 2:30 बजे तक विजिबिलिटी जीरो मीटर रिकॉर्ड की गई, जो सुबह 8:30 बजे तक बनी रही। इसके बाद इसमें सुधार हुआ और सुबह 10 बजे तक यह 400 मीटर हो गई। पालम एयरपोर्ट पर सुबह 6:00 बजे से 9:00 बजे तक विजिबिलिटी 50 मीटर रिकॉर्ड की गई, जिसके बाद इसमें सुधार हुआ और सुबह 10 बजे तक यह 400 मीटर हो गई।

दिल्ली में इस बार सामान्य से ज्यादा बारिश हुई
दिल्ली के लोग 14 अक्तूबर के बाद से ही प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं। मई, जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर के महीने दिल्ली में इस बार सामान्य से ज्यादा बारिश हुई थी। इसके चलते हवा भी काफी साफ रही थी, लेकिन मॉनसून की वापसी के बाद से ही प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा। 14 अक्टूबर के बाद एक दिन भी ऐसा नहीं रहा है, जब वायु गुणवत्ता का स्तर 200 के नीचे आया हो। खासतौर पर बीते दो दिनों में प्रदूषण के जहर से हवा बेहद दमघोंटू हो गई है। मानकों के मुताबिक हवा में पीएम 10 का स्तर 100 से और पीएम 2.5 का स्तर 60 से कम होने पर ही उसे स्वास्थ्यकारी माना जाता है। लेकिन दिल्ली-एनसीआर की हवा में पीएम 10 का स्तर रविवार की शाम 5 बजे 449.2 और पीएम 2.5 का औसत स्तर 297.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पर पहुंच गया था। यानी दिल्ली-एनसीआर की हवा में मानकों से लगभग साढ़े चार गुना ज्यादा प्रदूषण मौजूद है।

कई इलाकों में आपातकालीन स्तर
सीपीसीबी के मानकों के मुताबिक वायु गुणवत्ता सूचकांक 450 से 500 तक होने पर उसे गंभीर प्लस यानी गंभीरतम श्रेणी में रखा जाता है। लेकिन, 500 से ऊपर के वायु गुणवत्ता सूचकांक की गणना नहीं की जाती है। यह माना जाता है कि 500 के ऊपर आपात स्थिति शुरू हो जाती है। इस तरह से देखें तो, दिल्ली के वजीरपुर का वायु गुणवत्ता सूचकांक शाम के समय 500 के अंक पर पहुंच गया था। जबकि, कुछ अन्य इलाके ऐसे थे जहां का सूचकांक 500 के अंक तक पहुंचने के करीब रहा।

दिसंबर में दूसरी बार इतनी खराब हवा
दिल्ली में आमतौर पर नवंबर का महीना सबसे ज्यादा प्रदूषण वाला साबित होता रहा है। दीवाली पर होने वाली आतिशबाजी, पराली का धुआं, मौसम के कारक आदि मिलकर नवंबर की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित बना देते हैं। लेकिन, इस बार नवंबर के महीने में हवा की रफ्तार पहले की तुलना में तेज रही। जिसके चलते प्रदूषण का स्तर भी पहले की तुलना में कम रहा। लेकिन, दिसंबर में भयावह प्रदूषण देखने को मिल रहा है। सीपीसीबी द्वारा वर्ष 2015 के अप्रैल महीने में वायु गुणवत्ता सूचकांक की यह प्रणाली शुरू की गई थी। तब से लेकर अभी तक देखें तो दिसंबर महीने में यह दूसरा सबसे ज्यादा प्रदूषित दिन है। दिसंबर महीने के लिए सबसे ज्यादा प्रदूषित दिन 21 दिसंबर 2017 को रहा था, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 469 के अंक पर पहुंच गया था।

अभी राहत के आसार नहीं
राजधानी को प्रदूषित हवा से अभी राहत मिलने के आसार नहीं है। दरअसल, प्रदूषण की जो स्थिति है, उससे कोई बड़ी मौसमी परिघटना ही दिल्ली को बचा सकती है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा ग्रेप की सर्वोच्च पाबंदियां लगाई जा चुकी हैं। इसके बावजूद प्रदूषण के स्तर में कमी नहीं आई है। ऐसी स्थिति में अगर हवा की गति तेज होती है, तेज धूप निकलती है तो प्रदूषक कणों का विसर्जन तेज हो सकता है। मंगलवार को दिन के समय हवा की गति में थोड़ा तेजी आने की संभावना है। हालांकि, दिल्ली की हवा अभी बहुत खराब या फिर गंभीर में ही रहने का अनुमान है।

क्यों तेजी से बढ़ा प्रदूषण
दिल्ली में कुछ समय के लिए पूर्वी हवाएं चली थीं। जो अपने साथ ढेर सारी नमी लाईं। जबकि, हवा में प्रदूषण पहले से मौजूद था। नमी के चलते पहले तो दिल्ली में कोहरे जैसी स्थिति बनी फिर प्रदूषण और नमी के चलते स्मॉग की स्थिति बन गई। सोमवार को दिन भर यह स्थिति बनी रही। हवा की गति बेहद धीमी होने के चलते यह धुंध और नमी साफ नहीं हुई।

भांपने में असफल रही प्रणाली
प्रदूषण का पूर्वानुमान लगाने में भी प्रणालियां सफल साबित नहीं हो पा रही हैं। पूर्वानुमान लगाने के लिए तैयार किया गया प्रणाली का अंदाजा लगातार सटीक नहीं साबित हो रहा है। इससे पहले भी गंभीर हवा वाले दिन का यह प्रणाली पूर्वानुमान नहीं कर सकी।

वायु प्रदूषण आपको कैसे करता है प्रभावित
हवा में मौजूद प्रदूषकों को लंबे समय तक सांस के जरिए लेने से कोशिकाओं में सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव, इम्यूनसप्रेशन और म्यूटाजेनिसिटी होती है, जो फेफड़े, हृदय और मस्तिष्क सहित अन्य अंगों को प्रभावित करती है। ये सूक्ष्म कण हैं, जो फेफड़ों और रक्त धारा में प्रवेश कर सकते हैं। दिल्ली की हवा में 2.5 और 10 माइक्रोन से छोटे कण मुख्य प्रदूषक हैं।
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बच्चे सबसे अधिक जोखिम में
युवा बच्चे वयस्कों की तुलना में दोगुनी दर से सांस लेते हैं, जिससे वे अधिक मात्रा में प्रदूषक ग्रहण करते हैं। लंबे समय तक उच्च प्रदूषण से फेफड़ों का विकास प्रभावित होता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
अध्ययनों से पता चला है कि वायु प्रदूषण से अवसाद, स्किजोफ्रेनिया, बाइपोलरडिसऑर्डर और व्यक्तित्व विकारों का जोखिम बढ़ता है।

अब इनसे दूर रहें
उच्च प्रदूषण स्तर पर बाहरी व्यायाम (पार्क में व्यायाम, आउटडोरयोगा, सड़क पर जॉगिंग) से अधिक नुकसान हो सकता है। सड़कों के पास धूल और हानिकारक गैसें सबसे अधिक होती हैं।

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