प्रतिदिन औसतन 8.79 स्टेशन मानक से ऊपर
राजधानी के मॉनिटरिंग नेटवर्क में प्रतिदिन औसतन 8.79 स्टेशन मानक से ऊपर रिकॉर्ड हुए, जबकि एनसीआर के अन्य शहरों में औसतन 3.2 स्टेशन रोजाना सीमा से अधिक स्तर दर्ज कर रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के पूसा और आईएमडी परिसर के अलावा ग्रेटर नोएडा नॉलेज पार्क-5, नोएडा सेक्टर-125 और गाजियाबाद के वसुंधरा क्षेत्र ओजोन प्रदूषण के प्रमुख हॉटस्पॉट बनकर सामने आए हैं। साथ ही, ग्रेटर नोएडा नॉलेज पार्क-5 में 71 दिनों में से 44 दिन ओजोन का स्तर तय मानक से ऊपर दर्ज किया गया।
गर्मी और हीटवेव के दौरान रात में भी ओजोन का स्तर सुरक्षित सीमा से ऊपर
रिपोर्ट में एक और चिंताजनक बात सामने आई है कि दिल्ली-एनसीआर में ओजोन अब केवल दिन की समस्या नहीं रही। गर्मी और हीटवेव के दौरान रात में भी ओजोन का स्तर सुरक्षित सीमा से ऊपर बना रहता है। अध्ययन के दौरान दिल्ली-एनसीआर में 46 रात में ओजोन का स्तर मानक से अधिक दर्ज किया गया, जो देश में सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ओजोन प्रदूषण अब केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं है। मुंबई में पूरे वर्ष कई महीनों तक ओजोन का स्तर ऊंचा बना रहा, जबकि चेन्नई में अचानक ओजोन बढ़ने की घटनाएं सामने आईं। इसके अलावा, बेंगलुरु में लंबे समय तक लोगों के ओजोन के संपर्क में रहने की स्थिति दर्ज की गई।
विशेषज्ञ बाइट
दिल्ली-एनसीआर में ओजोन प्रदूषण अब स्थानीय नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की समस्या बन चुका है। इसलिए केवल धूल और पीएम 2.5 पर ध्यान देने के बजाय ओजोन बनाने वाली गैसों (नॉक्स और वॉक्स) के उत्सर्जन को भी नियंत्रित करना जरूरी है। -अनुमिता रॉयचौधरी, कार्यकारी निदेशक, सीएसई
जमीन के स्तर पर ओजोन का स्तर बढ़ रहा
छह साल के डेटा से पता चलता है कि जमीन के स्तर पर ओजोन का स्तर बढ़ रहा है। ऐसे दिनों की संख्या बढ़ रही है, जब यह तय मानकों से अधिक हो जाता है, खासकर गर्मियों में इसके संपर्क में रहने का समय बढ़ रहा है और वायुमंडलीय ट्रैपिंग के कारण रात में भी यह बना रहता है। -शरणजीत कौर, डिप्टी प्रोग्राम मैनेजर, अर्बन लैब, सीएसई