गाजियाबाद से दिल्ली-एनसीआर के लिए संचालित यूपी रोडवेज की सीएनजी बस सेवा छह माह में ही बंद कर दी गई। विभागीय अफसरों ने इसके पीछे यात्रियों का टोटा, जर्जर बसें और चालकों-परिचालकों की कमी का कारण बताया है।
दिल्ली-एनसीआर और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक सफर देने की महत्वाकांक्षी योजना के लिए बसों के परमिट पर ही रोडवेज ने 12 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए थे।
रोडवेज ने गाजियाबाद और नोएडा से दिल्ली-एनसीआर में जुलाई 14 में 22-22 बसें चलनी थीं। लेकिन परमिट मिलने में देरी होने से अक्टूबर में कौशांबी से बसें गुड़गांव, दिल्ली, मेरठ आदि जगहों के लिए शुरू हुई थीं।
कौशांबी एआरएम राकेश तितोरिया ने बताया कि बसों की हालत जर्जर होने के कारण ये कार्यशाला से ही नहीं निकल पा रही हैं। साथ ही दिल्ली में लो-फ्लोर बस और मेट्रो होने के कारण बसों को सवारियां ही नहीं मिल रही थीं।
रोडवेज के पास ड्राइवर-परिचालकों की भी कमी है। लिहाजा बसें घाटे का सौदा साबित हो रही थीं। सीएनजी बसों के परमिट के लिए रोडवेज को करीब 12 लाख रुपये से भी ज्यादा खर्च करना पड़ा था।
इसके साथ ही आगरा आदि शहरों से सीएनजी बसें मंगाई गई थीं। लेकिन दिल्ली-एनसीआर के रूटों पर बसें नहीं चल पाने से परमिट का कोई उपयोग नहीं हो सकेगा। लिहाजा रोडवेज को घाटा सहना पड़ेगा।
9 को थम सकता है बसों का चक्का
9 अप्रैल को महानगर में रोडवेज बसों के चक्के थम सकते हैं। रीजन से करीब 600 कर्मचारी 13 सूत्रीय मांगों के लिए लखनऊ में होने वाले धरने में शामिल होंगे।
बृहस्पतिवार को रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के पदाधिकारियों ने पुराना बस अड्डे स्थित कार्यालय पर बैठक कर आंदोलन की रणनीति बनाई।
क्षेत्रीय अध्यक्ष गुलजार अहमद, क्षेत्रीय मंत्री सुभाष चंद शर्मा और प्रांतीय उपाध्यक्ष जयपाल सिंह ने कर्मचारियों के साथ बैठक की।
कई मांगों के विरोध में 9 अप्रैल को लखनऊ में प्रदेश भर के कर्मचारी धरना देंगे। बैठक में राजकुमार गुप्ता, देवेंद्र सिंह, राजकुमार जैन, यशवीर सिंह आदि रहे।