बृहस्पतिवार सुबह 6:30 बजे सफदरजंग में दृश्यता 800 मीटर दर्ज की गई। वहीं, राजधानी में वजीरपुर सर्वाधिक प्रदूषित रहा। यहां एक्यूआई 450 पार के दर्ज किया गया। साथ ही 12 इलाकों की हवा गंभीर श्रेणी में रही। 24 इलाकों का एक्यूआई बेहद खराब श्रेणी में दर्ज किया गया। एनसीआर में दिल्ली के बाद गाजियाबाद सर्वाधिक प्रदूषित रहा। दिल्ली की हवा समग्र रूप से बेहद खराब श्रेणी में बनी रही। वहीं, छह नवंबर को दिल्ली में पीएम 2.5 की मात्रा में पराली जलाने से होने वाला रोजाना औसत योगदान लगभग 22.775 फीसदी रहा।
शनिवार तक बेहद खराब श्रेणी में बनी रहेगी हवा
भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के मुताबिक बृहस्पतिवार को हवा विभिन्न दिशा की ओर से चली। इस दौरान हवा की गति 4 से 8 किलोमीटर प्रतिघंटा रही। शुक्रवार को हवा विभिन्न दिशा से चलने का अनुमान है। इस दौरान हवा 4 से 8 किलोमीटर प्रतिघंटे से चलेगी। वहीं, शनिवार को हवा विभिन्न दिशा की ओर से चलेगी। हवा की चाल 4 से 10 किलोमीटर प्रतिघंटे रहने का अनुमान है। रविवार को हवा विभिन्न दिशा की ओर से चलेगी। इस दौरान हवा की चाल 4 से 10 किमी प्रतिघंटा रहेगी। वहीं, रात के समय हल्का कुहासा छाए रहने की संभावना है। साथ ही, स्मॉग छाया रहेगा। ऐसे में हवा बेहद खराब श्रेणी में बनी रहेगी।
एनसीआर में प्रदूषित शहरों का एक्यूआई
दिल्ली --- 377
गाजियाबाद --- 316
गुरुग्राम --- 302
ग्रेटर नोएडा --- 288
नोएडा --- 278
फरीदाबाद --- 257
(नोट: आंकड़े सीपीसीबी के मुताबिक)
दिल्ली के विभिन्न इलाकों में अधिकतम एक्यूआई दर्ज
वजीरपुर --- 454
जहांगीरपुरी --- 434
अशोक विहार --- 430
मुंडका --- 430
बवाना --- 427
विवेक विहार --- 424
रोहिणी --- 424
सोनिया विहार --- 419
न्यू मोती बाग --- 412
नेहरू नगर --- 406
पंजाबी बाग --- 403
(नोट: यह सभी आंकड़े सीपीसीबी के मुताबिक)
मरीजों की संख्या में 15-20 प्रतिशत की वृद्धि: एम्स के डॉक्टर
दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या के चलते, नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पल्मोनोलॉजी विभाग के ओपीडी में सांस की समस्या वाले कई मरीज आ रहे हैं, गुरुवार को एक डॉक्टर ने यह जानकारी दी। एम्स के पल्मोनोलॉजी विभाग के ओपीडी में बड़ी संख्या में मरीज देखे गए, जैसा कि तस्वीरों में दिखाया गया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पल्मोनरी, क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. करण मदान ने एएनआई को बताया कि हम देख रहे हैं कि मरीजों को बहुत सारी समस्याएं हो रही हैं। अस्थमा जैसी सांस की बीमारियों वाले मरीज और सीओपीडी के मरीज। अब ओपीडी में बहुत अधिक मरीज आ रहे हैं। कई मरीजों ने शिकायत की है कि उनका अस्थमा बिगड़ रहा है।