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चिंताजनक: सर्दियों में कम प्रदूषण के बावजूद दिल्ली NCR के पांच शहरों में सबसे प्रदूषित, नोएडा का ऐसा रहा हाल

Tue, 07 Mar 2023 05:36 AM IST
आकाश दुबे एजेंसी, नई दिल्ली

सार

सीएसई में हुआ यह विश्लेषण अर्बन लैब ने किया है। इसके मुताबिक वायु प्रदूषण के मौसमी औसत स्तरों में लगातार गिरावट हो रही है। हालांकि शहर के स्टेशनों पर उच्च स्तर मौजूद है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) के मुताबिक पिछली सर्दियों में प्रदूषण का स्तर कम रहने के बावजूद नई दिल्ली इस साल एनसीआर के पांच शहरों में सबसे प्रदूषित रहा। सीएसई के अध्ययन के मुताबिक दिल्ली में अभी भी एनसीआर के प्रमुख शहरों में ‘गंभीर’ या ‘खराब’ वायु गुणवत्ता वाले दिनों की संख्या सबसे अधिक थी। एनसीआर का नोएडा सबसे कम प्रदूषित शहर रहा।

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सीएसई की कार्यकारी निदेशक-अनुसंधान अनुमिता रॉयचौधरी ने कहा, रिपोर्ट में दिल्ली-एनसीआर में पूरे सर्दियों के मौसम (अक्तूबर 2022-जनवरी 2023) के दौरान पीएम 2.5 के व्यापक विश्लेषण से पता चलता है कि सर्दियों में प्रदूषण वक्र में झुकाव आया है और चरम का स्तर भी घटा है। सीएसई में हुआ यह विश्लेषण अर्बन लैब ने किया है। इसके मुताबिक वायु प्रदूषण के मौसमी औसत स्तरों में लगातार गिरावट हो रही है। हालांकि शहर के स्टेशनों पर उच्च स्तर मौजूद है। एनसीआर के बड़े हिस्से में शहरों और कस्बों के बीच मौसमी औसत काफी भिन्न रहा, लेकिन उच्च प्रदूषण का दौर बड़ी दूरी के बावजूद समकालिक था।

पिछले पांच सालों का है आकलन
यह विश्लेषण दिल्ली-एनसीआर में 2018, 2019, 2020, 2021 और 2022 के लिए 1 अक्तूबर से 31 जनवरी की अवधि के लिए पीएम 2.5 एकाग्रता में वार्षिक और मौसमी रुझानों का आकलन है। यह विश्लेषण वर्तमान में काम कर रहे वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों से उपलब्ध वास्तविक समय के आंकड़ों पर आधारित है। 

यह सुधार मौसमी विज्ञान, प्रदूषण पूर्वानुमानों पर आपातकालीन कार्रवाई का संयुक्त प्रभाव
रायचौधरी ने कहा, यह सुधार मौसम विज्ञान और प्रदूषण पूर्वानुमान पर आधारित आपातकालीन कार्रवाई का संयुक्त प्रभाव है। सर्दियों के शुरुआती चरणों में भारी और विस्तारित वर्षा हुई थी जिसने स्मॉग को बनने से रोका और मौसमी औसत को भी कम किया। गिरावट के बावजूद, दिल्ली एनसीआर के शहरों और कस्बों में सबसे प्रदूषित बना हुआ है। स्वच्छ हवा के मानक को पूरा करने के लिए वाहनों, उद्योग, अपशिष्ट जलाने, निर्माण, ठोस ईंधन और बायोमास जलाने पर अधिक मजबूत कार्रवाई के साथ इस गिरावट की प्रवृत्ति को कायम रखना होगा। 

सबसे कम प्रदूषित रही बीती सर्दी
विश्लेषण के मुताबिक सर्दी पिछले पांच वर्षों में सबसे कम प्रदूषित थी। अक्तूबर से जनवरी की अवधि के लिए दिल्ली का शहर-व्यापी शीतकालीन औसत 160 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था, जो 2018-19 में व्यापक पैमाने पर निगरानी शुरू होने के बाद से सबसे कम स्तर दर्ज किया गया है। 

निपटने के लिए मजबूत कदम उठाने होंगे 
दिल्ली और पड़ोसी शहर फरीदाबाद, गाजियाबाद, गुरुग्राम व नोएडा एनसीआर के अन्य शहरों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक प्रदूषित थे। यह इस क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती है और इससे निपटने के लिए मजबूत कदम उठाने होंगे। -अविकल सोमवंशी, सीनियर प्रोग्राम मैनेजर (अर्बन लैब)

इस सर्दी पराली जलाने की घटनाएं हुईं आधी
रिपोर्ट के मताबिक पिछली बार की तुलना में इस सर्दी में पराली जलाने की घटना आधी रह गई। नासा के वीआईआईआरएस उपग्रह के अनुसार, इस साल पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में अक्तूबर और नवंबर के महीनों में पराली जलाने की कुल संख्या क्रमश: 55,846 और 12,158 थी। ये 2021-22 में क्रमश: 36 फीसदी और 40 फीसदी कम हैं। यदि आग की संख्या के अलावा एफआरपी (अग्नि विकिरण शक्ति जो आग की तीव्रता का माप है) को ध्यान में रखा जाए, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि न केवल आग की संख्या कम थी, बल्कि पिछले दो साल की तुलना में तीव्रता में भी कम थी।
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20% के करीब हुआ सुधार 
दिल्ली में स्थित 36 सीएएक्यूएमएस स्टेशनों से दर्ज औसत निगरानी डाटा की गणना में पीएम2.5 स्तर, 2018-19 की सर्दियों के मौसमी औसत की तुलना में 17 प्रतिशत कम था। सबसे पुराने 10 स्टेशनों के सबसेट के आधार पर करीब 20 फीसदी का सुधार हुआ है। विश्लेषण से पता चला कि इस सर्दी के दौरान अभी भी 10 दिन गंभीर और गंभीर से अधिक वायु गुणवत्ता और चार दिन लंबा स्मॉग रहा।
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