दिल्ली मेट्रो ने यात्रियों को निशुल्क पेयजल मुहैया करवाने से इंकार कर दिया है। दिल्ली मेट्रो ने हाईकोर्ट में कहा कि वह यात्रियों को निशुल्क पेयजल मुहैया नहीं कर सकती क्योंकि उसके पास पानी का अपना कोई स्रोत नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ के समक्ष दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने हलफनामा पेश कर कहा कि वह अपने स्टाफ के लिए भी पानी दिल्ली जल बोर्ड से लेती है। यात्रियों के लिए प्रत्येक स्टेशन पर दो रुपये प्रति गिलास की कीमत पर पानी उपलब्ध है। जिन स्टेशनों पर यह सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां पर वेंडिंग मशीन लगने तक यात्रियों को मेट्रो निशुल्क पानी मुहैया करवाएगी।
याचिका पर सुनवाई के दौरान यात्रियों को मेट्रो स्टेशनों पर पेयजल व शौचालय मुहैया करवाने की अपनी योजना भी हाईकोर्ट में पेश कर दी। कोर्ट ने याची को मेट्रो की योजना पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 21 जनवरी की तारीख तय की है।
हाईकोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मेट्रो से 20 अगस्त को पूछा था कि वह सभी स्टेशनों पर निशुल्क पेयजल व शौचालय सुविधा मुहैया कराने की योजना को कैसे लागू करेगी। कोर्ट ने यह निर्देश कुश कालरा की अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है।