केंद्र और दिल्ली सरकार में खींचतान से अटकी 104 किलोमीटर दिल्ली मेट्रो फेज चार की परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि वह इस पर जल्द आदेश पारित करेगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह प्रोजेक्ट और इंतजार नहीं कर सकता। दरअसल केंद्र और दिल्ली सरकार में इस प्रोजेक्ट को लेकर वित्तीय पेच फंसा हुआ है।
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ को अमाइकस क्यूरी वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने बताया कि यह प्रोजेक्ट ‘महत्वपूर्ण’ है इसलिए इस मामले को तुरंत सुलझाना चाहिए। वकील ने पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण की ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 103.94 किलोमीटर के चौथे चरण का काम 2014 से ठप पड़ा है। तब इसकी मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास प्रस्ताव भेजा गया था।
दिल्ली सरकार ने इस साल 10 अप्रैल को डीएमआरसी को निर्देश दिया था कि जब तक इन मसलों का समाधान नहीं हो जाता तब तक वह फेज चार का काम शुरू न करे। अमाइकस क्यूरी ने पीठ से कहा कि प्रोजेक्ट में देरी से परिचालन घाटा हो रहा है। केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एएनएस नादकर्णी ने कहा कि प्रोजेक्ट के लिए धन का मसला मेट्रो रेल नीति 2017 और अन्य शहरों के मेट्रो प्रोजेक्ट के तालमेल से तय हुआ था। उसी तर्ज पर दिल्ली मेट्रो फेज चार के लिए धन की व्यवस्था की गई थी।
खर्च वहन करने की पिछली व्यवस्था की जानकारी मांगी
पीठ ने नादकर्णी से केंद्र और राज्यों के बीच कर और जमीन की कीमत का खर्च वहन करने की जिम्मेदारी के बारे में पिछली व्यवस्था के बारे में पूछा। इस पर नादकर्णी ने कहा कि वह निर्देश लेकर पीठ को बताएंगे। इस पर पीठ ने मामले की सुनवाई 12 जुलाई तक टाल दी और कहा कि आप निर्देश लीजिए, हम आदेश पारित करेंगे। यह प्रोजेक्ट और इंतजार नहीं कर सकता।