विद्युत विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सितंबर 2009 में बिजली निगम की ओर से दिल्ली मेट्रो को बिजली दी गई थी। यह बिजली सब्सिडी पर दी गई थी और उसी समय से बिल जमा कराने के लिए विभाग के अधिकारी पत्र लिख रहे हैं। मगर दिल्ली मेट्रो की ओर से केवल यूनिट का बिल जमा कराया जाता रहा है जबकि टैक्स को छोड़ दिया जाता था। यह रकम अब 9 करोड़ 70 लाख रुपये से अधिक हो गई है।
मगर मेट्रो की ओर से जब इसे जमा नहीं किया गया तो आरसी जारी करते हुए तहसील के लिए नोटिस दे दिया। जिला प्रशासन की ओर भी बिल जमा कराने के लिए कहा गया लेकिन मेट्रो ने कोई बात नहीं सुनी। इस पर विभाग के अधिकारियों ने बॉटेनिकल गार्डन पर डुगडुगी बजाकर चेतावनी दी। इसके अलावा बिजली विभाग ने बॉटेनिकल गार्डन पर जांच पड़ताल की थी तो उसमें सब्सिडी बिजली से दुकानों को कनेक्शन दिए गए थे।
जिसका 10 करोड़ 12 लाख रुपये पैनाल्टी बनाई गई थी। मगर मेट्रो की ओर से केवल 1 करोड़ 35 लाख रुपये जमा करके इतिश्री कर ली। जबकि बिजली विभाग की ओर से बाकी रकम को जमा करने के लिए कई बार पत्र लिखा जा चुका है। यदि मेट्रो की ओर से बकाया जमा नहीं किया तो इसकी भी रिकवरी नोटिस(आरसी) जारी कर दी जाएगी।