दिल्ली पुलिस ने अबू सलेम व अन्य पांच आरोपियों पर मकोका में एक अलग एफआईआर दर्ज की थी। अबू सलेम ने प्रत्यर्पण संधित का हवाला देते हुये मकोका लगाये जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। प्रत्यर्पण संधि के मुकदमा सलेम को उम्रकैद या मौत की सजा नहीं सुनाई जा सकती जबकि मकोका में यह सजा हो सकती है।
हाईकोर्ट ने इस संधि के मद्देनजर अबू सलेम से मकोका हटा दिया था। इस आधार पर निचली अदालत ने 26 मई को अन्य चार आरोपियों को मकोका ने बरी कर दिया था। निचली अदालत के समक्ष अबू सलेम के वकील एमएस खान ने जिरह करते हुये कहा कि उनके मुव्वकिल की केस की सुनवाई में प्रत्यर्पण संधि की शर्तों का उल्लंघन हुआ है।
इस बात का भी कोई साक्ष्य नहीं है कि उसने अशोक गुप्ता से रंगदारी मांगी थी। बता दें कि अबू सलेम को नवंबर 2005 में पुर्तगाल से लाया गया था और इस मामले में उसे एक जून 2007 को गिरफ्तार किया गया था। उसे 2013 में जमानत मिल गई थी। वह 1993 मुंबई धमाकों के अलावा कई अन्य मामलो में मुंबई की जेल में बंद है।