उपराज्यपाल ने केजरीवाल को जवाबी पत्र लिखा है। इसमें उनका कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की व्याख्या आप गलत तरीके से कर रहे हैं। सेवा का मामला नियमित पीठ में लंबित होने से अभी उस पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। उपराज्यपाल ने इस बात पर भी हैरानी जताई है कि बिना उनके दफ्तर तक पहुंचे मुख्यमंत्री का पत्र मीडिया में सार्वजनिक कर दिया गया।
उपराज्यपाल ने अपने पिछले पत्र का संदर्भ देते हुए लिखा है कि उस पत्र में चुनिंदा तथ्यों पर ही मुख्यमंत्री बात कर रहे हैं। उसमें कहा गया था कि वह फैसले के प्रभाव का अब तक अध्ययन कर रहे हैं। वहीं, उसमें मामले के नियमित बेंच में जाने का जिक्र था।
इसके अलावा, पिछले पत्र में उन्होंने संविधान के अनुछेद 145 के उपखंड (3) की तरफ ध्यान दिलाया था, लेकिन मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कानूनी प्रावधानों की चर्चा नहीं की है। उपराज्यपाल ने हैरानी जताई है कि मुख्यमंत्री का पत्र पहले उन्हें मिलना चाहिए, लेकिन वह राजनिवास पहुंचने से पहले ही सोशल व इलेक्ट्रानिक मीडिया पर जारी कर दिया गया है।