स्वतंत्रता दिवस से पहले पतंगबाजी अपने चरम पर होती है, ऐसे में पतंगबाजी का शौक बेजुबानों का दर्द बढ़ा रहा है। 1 से 4 अगस्त के बीच 250 से अधिक पक्षियों को बचाया गया। मांझे से गहरे घाव, टूटे हुए अंग या आंखों की रोशनी जाने की घटनाएं शामिल हैं। इनमें से अधिकतर मामले प्रतिबंधित चाइनीज मांझे से हुए हैं। दिल्ली-एनसीआर में चौबीसों घंटे पक्षी एम्बुलेंस सेवाएं चलाने वाले एक गैर-सरकारी संगठन को चार दिनों की अवधि के दौरान 250 से अधिक की सूचना मिली है। ऐसे में आने वाले दिनों में पशु चिकित्सकों और वन्यजीव बचाव समूहों ने पक्षियों के घायल होने की घटनाओं में तेजी से वृद्धि की सूचना दी है।
हर साल औसतन दो से तीन लोगों गंवा रहे अपनी जान
राजधानी में जुलाई से शुरू होने वाला पतंगबाजी का दौर 15 अगस्त के बाद तक जारी रहता है। इस दौरान हर साल औसतन दो से तीन लोगों की मौत चाइनीज मांझे की चपेट में आने से हो जाती है। वहीं, 40 से ज्यादा लोग घायल होते हैं। चोरी-छिपे इनकी बिक्री जारी है।
दिल्ली के जीटीबी अस्पताल, स्वामी दयानंद अस्पताल, खिचड़ीपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल, उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जग प्रवेश चंद्र अस्पताल में हर साल मांझे से घायल करीब 20 से 25 लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। सबसे ज्यादा पतंगबाजी भी पूर्वी दिल्ली, उत्तर-पूर्वी दिल्ली और शाहदरा क्षेत्र में होती है। जीटीबी अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि जुलाई और अगस्त दो माह में चाइनीज मांझे से घायल होने के मामले सबसे ज्यादा आते हैं।