Traffic jam after rain in Delhi file
- फोटो : PTI
राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में भले ही ट्रैफिक पुलिस व सरकार योजनाएं बना रही हों लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार की गति बेहद धीमी है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से हाल ही में आयोजित समीक्षा बैठक में खुलासा हुआ है कि राजधानी में 233 ऐसे स्थान हैं जहां मामूली सड़क इंजीनियरिंग सुधारों की जरूरत है लेकिन संबंधित एजेंसियों की लापरवाही के कारण काम अधूरे हैं। इससे लोगों को जाम आदि से निजात नहीं मिल पा रही है।
दरअसल, अलग-अलग विभागों को दिल्ली पुलिस आयुक्त की तरफ से 6 मार्च को सूची भेजी गई थी जिसमें प्रमुख सड़कों और चौराहों पर सुधार करने का आग्रह किया गया था। सूची में बताए गए सुधार कार्य जाम कम करने और सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक बताए गए थे। इनमें से कुछ कार्य वर्षों से लंबित हैं।
बीते दिनों पीडब्ल्यूडी और अन्य विभागों की बैठक में पता चला कि 233 जगहों में से कुछ का ही सुधार कार्य किया गया है। सूची में 22 स्थान दिल्ली परिवहन निगम, 14 एनडीएमसी, 29 एमसीडी, 22 राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, 12 डीडीए, 1 जल बोर्ड व 123 स्थान पीडब्ल्यूडी के अधीन आते हैं। बताया जा रहा है कि एजेंसियों को समयबद्ध तरीके से काम निपटाने के निर्देश दिए गए थे लेकिन अब तक अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है।
नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश
ट्रैफिक पुलिस ने बताया कि बार-बार अनुरोध और फॉलोअप के बावजूद सिविक एजेंसियों ने इन बिंदुओं पर अपेक्षित कार्य नहीं किया। ट्रैफिक पुलिस की ओर से संयुक्त पुलिस आयुक्त (ऑपरेशन्स) की अध्यक्षता में सब-कमेटी बनाई गई है जो हर सप्ताह इन मामलों की समीक्षा कर रही है। पीडब्ल्यूडी ने अब सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने विभाग के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करें जो ट्रैफिक पुलिस और पीडब्ल्यूडी के साथ समन्वय कर कार्यों में तेजी लाएं। साथ ही, नोडल अधिकारी का मोबाइल नंबर भी तुरंत साझा करने को कहा गया है।
यह समस्याएं हैं सबसे अधिक
- यू-टर्न की व्यवस्था का अभाव
- फुटपाथों पर अतिक्रमण
- सड़क चौड़ाई कम होना
- ट्रैफिक सिग्नल की अनुपस्थिति
- अव्यवस्थित बस स्टॉप
- रोड डिवाइडर की ऊंचाई या चौड़ाई असमान होना
- जेब्रा क्रॉसिंग या साइनबोर्ड का न होना