बकरीद के मौके पर जैन समाज ने दिल्ली-एनसीआर से करीब 600 बकरे खरीदे। इनकी कीमत एक करोड़ रुपये से ज्यादा है। इस राशि को समाज की तरफ से किए गए अंशदान से जुटाया गया। दिलचस्प यह है कि उत्तर प्रदेश के बागपत में इनके लिए बकराशाला बनवाई गई है।
जीव दया संस्थान नाम की संस्था ने बकरों को यहां भेज दिया है। बकराशाला में बकरों की ताउम्र देखरेख के लिए चिकित्सकों के साथ सहायक स्टाफ है। जैन समाज की दो संस्थाओं ने अपने-अपने स्तर पर यह काम किया है।
जीव दया संस्थान ने बकरीद से दो-तीन दिन पहले दिल्ली के गाजीपुर, सीलमपुर और जाफराबाद समेत बुलंदशहर की गुलावठी की मंडी से बकरे खरीदे हैं।
करीब 500 बकरों की कीमत एक करोड़ रुपये से ज्यादा आई है। इनको बागपत की बकराशाला भेज दिया गया है। संस्थान से जुड़े अर्जुन जैन ने बताया कि जियो और जीने दो के संदेश का पालन करते हुए हमने पहल की है। इसमें स्वाभाविक मौत होने तक बकरों की देखभाल की जाएगी। बकराशाला में चिकित्सकों के साथ पूरा सहायक स्टाफ है। यहां इनकी हर तरह से देखभाल की जाएगी। इससे सभी बकरे अपनी 12-15 साल तक की औसत उम्र पूरी कर सकेंगे।
मछलियां भी खरीदता है जीव दया संस्थान
जीव दया संस्थान का दावा है कि हर महीने वह गाजीपुर से 50-60 हजार मछलियां खरीदता है। इसकी कीमत करीब दो लाख रुपये बैठती है। इनको बाद में ऐसे जल स्रोतों में छोड़ा जाता है, जहां इनका शिकार नहीं होता। इससे मछलियों का जीवन बचाने में कामयाबी मिल जाती है।
चांदनी चौक से 124 बकरे खरीदे
पेशे से सीए विवेक जैन ने बकरीद पर चांदनी चौक से 124 बकरे खरीदे। इनकी कीमत 15 लाख रुपये आई। जैन समाज के आपसी सहयोग से रकम जुटाई गई। इनको पुरानी दिल्ली के धरमपुर इलाके के जैन मंदिर में इकट्ठा किया गया। इससे पहले 15 जून की शाम जैन समाज ने 25 लोगों की एक टीम बनाई। पैसे के लिए व्हाट्सएप पर मैसेज भेजा गया।
चिराग ने कहा कि हम लोग वहां मुस्लिम बनकर गए थे आैर बकरों के रेट पूछे। अगले दिन टीम के सदस्य गुप्त तरीके से जामा मस्जिद, मीना बाजार, मटिया महल और चितली कबर बाजार गए। सभी ने कुर्ता पहन रखा था। विवेक ने बताया कि खरीदते समय हमें किसी भी तरह का कोई डर नहीं था। बस फिक्र इस बात की थी कि मालूम हो जाने पर विक्रेता उनसे अतिरिक्त रकम की मांग करते, जबकि हम लोगों की कोशिश ज्यादा से ज्यादा बकरों को बचाने की थी। मोलभाव करने से बात 10,000 रुपये प्रति बकरे पर बन गई। इससे 124 बकरों की खरीद हुई।
मुस्लिम बनकर गए जैन समुदाय के लोग
पेशे से सीए विवेक जैन ने बकरीद पर चांदनी चौक से 124 बकरे खरीदे। इनकी कीमत 15 लाख रुपये आई। जैन समाज के आपसी सहयोग से रकम जुटाई गई। इनको पुरानी दिल्ली के धरमपुर इलाके के जैन मंदिर में इकट्ठा किया गया। इससे पहले 15 जून की शाम जैन समाज ने 25 लोगों की एक टीम बनाई। पैसे के लिए व्हाट्सएप पर मैसेज भेजा गया।
चिराग ने कहा कि हम लोग वहां मुस्लिम बनकर गए थे आैर बकरों के रेट पूछे। अगले दिन टीम के सदस्य गुप्त तरीके से जामा मस्जिद, मीना बाजार, मटिया महल और चितली कबर बाजार गए। सभी ने कुर्ता पहन रखा था। विवेक ने बताया कि खरीदते समय हमें किसी भी तरह का कोई डर नहीं था। बस फिक्र इस बात की थी कि मालूम हो जाने पर विक्रेता उनसे अतिरिक्त रकम की मांग करते, जबकि हम लोगों की कोशिश ज्यादा से ज्यादा बकरों को बचाने की थी। मोलभाव करने से बात 10,000 रुपये प्रति बकरे पर बन गई। इससे 124 बकरों की खरीद हुई।