संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राजधानी ने बीती शाम कर्नाटक शास्त्रीय संगीत की ऐसी सुरमयी शाम देखी, जिसमें दक्षिण भारत की संगीत परंपरा की गहराई और साधना दिल्ली के रसिकों तक पहुंची। गुरुकुलम फाउंडेशन ने एचसीएल कॉन्सर्ट्स के सहयोग से चौथे ग्लोबल कर्नाटक कॉन्फ्लुएंस का आयोजन किया। कार्यक्रम में प्रख्यात गायक विद्वान सिक्किल गुरूचरण की प्रस्तुति के साथ दिग्गज मृदंगम वादक डॉ. उमयालपुरम के शिवरामन, वायलिन पर विद्वान दिल्ली आर श्रीधर और कांजीरा पर विद्वान बी एस. पुरुषोत्तम ने संगत की।
शाम की शुरुआत नट्टैकुरिंजी के शांत और मधुर स्वरों से हुई। इसके बाद भगवान गणेश को समर्पित षण्मुखप्रिया की प्रस्तुति ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम आगे बढ़ा तो कल्याणी राग की भव्यता में देवी की आराधना ने श्रोताओं को बांधे रखा। स्वर, लय और वाद्य संगत के इस खूबसूरत मेल ने सभागार में मौजूद संगीतप्रेमियों को कर्नाटक संगीत की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराया।
सिक्किल गुरूचरण की गायकी में जहां शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सुनाई दीं, वहीं उमयालपुरम के शिवरामन की मृदंगम संगत ने प्रस्तुति में लय का मजबूत आधार दिया। वायलिन और कांजीरा ने इस संगीत संवाद को और विस्तार दिया। चारों कलाकारों की जुगलबंदी में दक्षिण भारतीय शास्त्रीय संगीत की वह परंपरा दिखाई दी, जिसमें गायन और वाद्य एक-दूसरे के पूरक बनकर प्रस्तुति को आगे बढ़ाते हैं। कार्यक्रम को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय का सहयोग मिला। वर्सिजेंट प्लैटिनम पार्टनर और जीएनआरएल ऑयल एंड गैस लिमिटेड पार्टनर रहा, जबकि एचसीएल कॉन्सर्ट्स ने गुरुकुलम फाउंडेशन के सहयोगी के रूप में आयोजन को समर्थन दिया।