- परिवहन मंत्री ने सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों की सुरक्षा के लिए लिया निर्णय
-बस निर्माताओं को पूरी फ्लीट का सुरक्षा ऑडिट, चार्जिंग और बैटरी सिस्टम की कड़ी निगरानी के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
डीटीसी की बसों में लगने वाली आग को दिल्ली आईआईटी की टीम रोकेगी। इसके लिए बसों की रिपल करंट की रियल टाइम मॉनिटरिंग, इंजन और बैटरी सेक्शन में फायर सप्रेशन सिस्टम के अपग्रेडेशन और सभी बस डिपो में इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत करने पर काम किया जाएगा।
डीटीसी की सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों में आग लगने की हालिया घटनाओं को लेकर परिवहन मंत्री डॉ पंकज कुमार सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सुरक्षा प्रोटोकॉल तुरंत मजबूत किए जाएं और आईआईटी दिल्ली की सिफारिशों को एक्शन प्लान में शामिल कर आग की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। सोमवार को परिवहन मंत्री ने सचिवालय में अधिकारियों के साथ समीक्षा की। इसमें परिवहन विभाग, डीटीसी के बड़े अधिकारी, बस निर्माताओं के प्रतिनिधि भी शामिल रहे। मंत्री ने रिपोर्टों की जांच के बाद अधिकारियों को निर्देश दिया कि बड़ी खराबी या दुर्घटना होने से पहले ही बसों की गहराई से जांच और मरम्मत की जाए। विशेष रूप से सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों की तकनीकी जांच, लो-वोल्टेज वायरिंग की मजबूती, बैटरी सिस्टम, ओवरचार्जिंग और ओवरहीटिंग की स्थिति की पूरी निगरानी की जाए।
आईआईटी दिल्ली की ये सिफारिशें लागू होंगी
मंत्री ने कहा कि आईआईटी दिल्ली की विशेषज्ञ समिति ने जो सिफारिशें दी थीं, उन्हें सुरक्षा एक्शन प्लान में शामिल किया जाएगा। इनमें रिपल करंट की रियल टाइम मॉनिटरिंग, इंजन और बैटरी सेक्शन में फायर सप्रेशन सिस्टम को अपग्रेड करने और सभी बस डिपो में इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत करना शामिल है। 200 चार्जिंग साइकल पार कर चुकी इलेक्ट्रिक बसों की बारीकी से जांच अनिवार्य होगी।
डीटीसी को मिले खास निर्देश
उन्होंने डीटीसी को यह भी निर्देश दिया कि टेलीमैटिक्स आधारित डायग्नोस्टिक्स से तापमान में होने वाले छोटे से छोटे बदलाव की भी पहचान की जाए। साथ ही बस डिपो तकनीशियनों की भी ट्रेंड किया जाए।