जर्जर मकान की छत गिरने से युवक की मौत
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शायद सूफियान की मौत ही उसे खींचकर मेरठ से बाबू नगर स्थित उसके घर ले आई थी...। यह कहकर सूफियान की बुआ के बेटे आदिल की आंखों से आंसू टप-टप गिरने लगे। दरअसल बकरीद मनाने के लिए सूफियान का पूरा परिवार मेरठ की जाकिर कालोनी स्थित अपने पैतृक घर गया हुआ था।
शुक्रवार को पूरा परिवार दिल्ली आ भी गया तो सुलेमान की बहन अफरोज ने सबको अपने यहां दावत पर बुला लिया। खाना-पीना करने के बाद पूरा परिवार मुस्तफाबाद में रुक गया। अगले दिन शनिवार दोपहर को सुलेमान परिवार को लेकर बाबू नगर स्थित अपने घर पहुंच गया और हादसे हो गया।
हादसे के बाद सुलेमान की पत्नी शबनम और बेटी लायबा की हालत गंभीर बनी हुई है। सभी परिजन उनके जल्द ठीक होने की दुआएं कर रहे हैं। रविवार को छुट्टी होने की वजह से सूफियान के शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका। सोमवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इसके बाद परिवार शव लेकर मेरठ रवाना होगा।
सुलेमान के एक परिजन ने बताया कि उनका पूरा परिवार मेरठ की जाकिर कालोनी में रहता है। सुलेमान के पिता अब्दुल अजाद, मां अनवरी बेगम वहां रहते हैं जबकि बड़ा भाई मोहम्मद अनवर अपने परिवार के साथ मेरठ के ही अब्दुल्लापुर में रहता है। शुरुआत में सुलेमान भी मेरठ में रहकर काम करता था। लेकिन चार साल पहले वह काम के लिए दिल्ली के बाबू नगर आ गया। यहां उसे इलेक्ट्रॉनिक कबाड़ का काम शुरू किया। सूफियान पिता के साथ ही काम करने लगा।
उन्होंने बताया कि सुलेमान ने छोटे फैजान का एक मदरसे में दाखिला करवाया हुआ है। वह वहीं पर रहता है, फिलहाल मदरसे की छुट्टियां होने की वजह से वह भी परिवार के साथ था। वहीं छोटा अर्शियान उत्तर-पूर्वी दिल्ली के एक पब्लिक स्कूल में आठवीं कक्षा का छात्र है। शनिवार रात को परिवार के सभी सदस्य सोने के लिए पहली और दूसरी मंजिल पर चले गए।
शबनम ने सूफियान से ऊपर आकर सोने के लिए कहा, लेकिन वह जिद करके ग्राउंड फ्लोर पर ही सो गया। परिजन रोते-रोते कहे जा रहे थे कि अगर वह भी ऊपर सोया होता तो शायद जिंदा होता।