इस इंजेक्शन से तीन माह तक प्रेगनेंसी रोकने का दावा किया गया है।
स्वास्थ्य महकमे की ओर से लोगों में जागरूकता फैलाई जा रही है कि एचआईवी छूने से नहीं फैलता। एचआईवी मरीजों से सामान्य व्यवहार करें और उन्हें भी इलाज का हक है लेकिन इन सभी बातों को दरकिनार करते हुए दिल्ली के सरकारी अस्पतालों ने एचआईवी पीड़ित गर्भवती महिला को यह कहते हुए भगा दिया कि यहां डिलीवरी नहीं हो सकती।
ऐसे में महिला की जिला अस्पताल में डिलीवरी हुई है। सीएमएस डॉ. नागेंद्र मोहन माथुर ने बताया कि महिला करीब तीन दिन पहले पति के साथ जिला अस्पताल आई थी। नोएडा निवासी महिला ने बताया कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों ने यह कहते हुए लौटा दिया कि यहां डिलीवरी नहीं हो सकती।
नोएडा के जिला अस्पताल जाओ, लेकिन वहां यह मत बताना कि रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव है। जांच में पता लगा कि महिला एचआईवी पॉजिटिव है, जबकि उसका पति एचआईवी नेगेटिव है।
बुधवार को डिलीवरी हुई, जिसमें लड़का हुआ है। पैथोलॉजिस्ट डॉ. एचएम लवानिया ने बताया कि बच्चे को डेढ़ साल तक एचआईवी संक्रमण से बचाव के लिए दवा दी जाएगी। करीब चार माह बाद उसका एचआईवी टेस्ट किया जाएगा, जिससे पता लग सकेगा कि बच्चा एचआईवी पॉजिटिव है या नहीं।