अस्पतालों ने भी अपने स्तर पर फीवर क्लीनिक बनाए हैं। साथ ही संक्रमित लोगों की जांच की जा रही है। डॉक्टरों की माने तो अस्पताल में आने वाले ज्यादातर मरीज मौसमी बीमारी से पीड़ित है। कुछ मरीजों में जांच के बाद निमोनिया निकल रहा है। वहीं कुछ मरीजों को सांस लेने व लंबे दिनों तक खांसी और बुखार की शिकायत दिख रही है। इसके अलावा बुखार, थकान, शरीर में दर्द सहित अन्य की परेशानी भी समस्या को बढ़ा रहा है।
लोकनायक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर सुरेश कुमार ने बताया कि अस्पताल पूरी तरह से इस इन्फ्लूएंजा से लड़ने के लिए तैयार है। अस्पताल में फिलहाल एच3एन2 वायरस से पीड़ित कोई मरीज भर्ती नहीं है। अस्पताल में 20 आइसोलेशन के बिस्तर ऐसे मरीजों के आरक्षित किए गए हैं। इन सभी पर ऑक्सीजन और बाइपेप की सुविधा उपलब्ध है।
डॉक्टर सुरेश ने बताया कि आईसीएमआर के सभी दिशानिर्देशों का पालन किया जा रहा है। अस्पताल के कर्मचारियों को भी एहतियात बरतने के लिए कहा गया है। वहीं लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज व सुचेता कृपाल अस्पताल के निदेशक डॉ. सुभाष गिरी ने बताया कि अस्पताल में एच3एन2 को देखते हुए फीवर क्लीनिक बनाया गया है।
इसके अलावा कुछ बिस्तर भी रिजर्व किया गए हैं। जरूरत पड़ने पर इनकी संख्या को बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में निमोनिया के कुछ मरीज भर्ती हुए हैं जिनका उपचार चल रहा है। इसके अलावा जीटीबी, सफदरजंग, एम्स, डीडीयू सहित अन्य अस्पतालों में भी इसे लेकर व्यवस्था की जा रही है।