Delhi Baby Care Hospital Fire: दिल्ली के विवेक विहार के बेबी केयर न्यू बॉर्न अस्पताल में आग लगने से सात मासूमों की मौत हो गई। पांच का दूसरे अस्पताल में इलाज जारी है। जिनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।
जन्म के 11 दिन बाद पहली बार बेटी ने आंख खोली। लगा कि घर की खुशी जल्द वापस लौट आएगी। पहली बार घर में कदम रखेगी, लेकिन क्या पता था कि कुछ घंटों बाद ही सबको छोड़कर चली जाएगी। यह दर्द है अंजार का।
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विवेक विहार स्थित बेबी केयर न्यू बॉर्न अस्पताल में लगी आग की घटना में बेटी को खोने वाले अंजार बताते हैं कि शनिवार को करीब तीन बजे अपनी बेटी को देखने गया था। उस समय डॉक्टरों ने बताया कि बेटी की स्थिति में सुधार हो रहा है। उसी समय पहली बार बेटी ने आंख भी खोली।
यह देखकर खुशी का ठिकाना नहीं रहा। 15 मई को निजी नर्सिंग होम में बेटी का जन्म हुआ था। जन्म के दौरान डॉक्टरों ने संक्रमण की शिकायत बताई। कहा था कि बेटी के मुंह में पेट का गंदा पानी चला गया है। उसे अतिरिक्त जांच के लिए अस्पताल में रखना होगा और यहां भेज दिया।
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वह 15 मई से ही अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती थी। शनिवार को बच्ची की स्थिति में सुधार के बाद कांति नगर, सीलमपुर स्थित घर में पत्नी नूरजहां के साथ जश्न की तैयारी करने लगे थे, लेकिन सुबह अस्पताल में आग लगने की जानकारी मिली। यह सुनते ही पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई।
जब अस्पताल पहुंचा तो बताया गया कि जीटीबी अस्पताल में जाना होगा। जीटीबी अस्पताल के शवगृह आकर पता चला कि जिन बच्चों ने दम तोड़ा उसमें उनकी बेटी भी है। वहीं उनके साथ आए परिजन ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन 15 हजार रुपये देने पड़ते थे।
फेसबुक से पता चला
जीटीबी अस्पताल के शवगृह में अपने पोते का शव लेने पहुंचीं फरजाना खातून ने कहा कि फेसबुक से घटना की जानकारी मिली। आग लगने के बाद अस्पताल प्रशासन ने जानकारी देने की जहमत नहीं उठाई। एक दिन पहले ही अस्पताल में बताया गया था कि पोते की हालत में सुधार हो रहा है।
नहीं दी कोई सूचना
टेक चंद शर्मा ने कहा कि इस घटना में उनके छोटे भाई के बच्चे की मौत हुई है। घटना के बाद अस्पताल की तरफ से कोई सूचना नहीं मिली। सुबह दूसरे लोगों से पता चला कि अस्पताल में आग लग गई। सूचना मिलते ही अस्पताल गए तो पता चला कि बच्चों को जीटीबी अस्पताल लेकर गए हैं। यहां आने के बाद पता चला कि बच्चे ने दम तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि घटना में हुई लापरवाही के बाद भी अस्पताल ने बताने की जिम्मेदारी नहीं निभाई। परिवार वाले अपने बच्चों के लिए इधर-उधर भटकते रहे।
मालिक ने कर लिया फोन बंद
शवगृह पहुंचे सभी परिजनों ने बताया कि अस्पताल के मालिक ने घटना के बाद से ही फोन बंद कर दिया। कोई जानकारी नहीं मिली। हर दिन पैसे जमा करने के लिए फोन करता था, लेकिन जब घटना हुई तो कोई सूचना तक नहीं दी। सभी ने कहा कि आरोपी को कड़ी सजा मिलती चाहिए।
आग में झुलसकर सात मासूमों की मौत
शाहदरा जिला के विवेक विहार स्थित बेबी केयर न्यू बॉर्न अस्पताल में आग में झुलसकर सात मासूमों की मौत हो गई। हादसे के समय अस्पताल में कुल 12 नवजात भर्ती थे। आग लगने पर पुलिस, दमकल विभाग, अस्पताल स्टाफ व पब्लिक ने किसी तरह अस्पताल की इमारत के पिछले हिस्से में मौजूद खिड़की के रास्ते सभी 12 बच्चों को निकालकर पूर्वी दिल्ली के एडवांस एनआईसीयू अस्पताल में भर्ती कराया, जहां सात मासूमों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि पांच बच्चों का उपचार जारी है। इनमें एक नवजात की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
पड़ोसियों का दावा है कि अस्पताल के भूतल पर अवैध रूप से ऑक्सीजन के छोटे सिलिंडरों की रिफिलिंग की जा रही थी। यहीं से आग लगी जो देखते ही देखते ऊपर अस्पताल में पहुंच गई।
देखते ही देखते आग ने अस्पताल के अलावा पड़ोस की दो अन्य इमारतों को अपनी चपेट में ले लिया। आग से पड़ोसी की बुटीक, एक चश्मे की दुकान, इंडसइंड बैंक का कुछ हिस्सा व पड़ोस की इमारत की पहली और दूसरी मंजिल भी जल गई। आग के दौरान अस्पताल के भूतल पर रखे ऑक्सीजन सिलिंडर एक-एक कर फटने लगे।
इसकी वजह से मौके पर अफरा-तफरी और भगदड़ मच गई। पुलिस सूत्रों का कहना है कि सात से आठ सिलिंडर फटे, जिनका मलबा करीब 150 मीटर तक आईटीआई तक पहुंचा। दमकल की 16 गाड़ियों ने आग पर एक घंटे में काबू पा लिया। हादसे के बाद अस्पताल का मालिक डॉक्टर नवीन कीची फरार है।
विवेक विहार थाना पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है। शाहदरा जिला के पुलिस उपायुक्त सुरेंद्र चौधरी ने बताया कि हादसे का शिकार हुए सात में से एक बच्चे की मौत शनिवार शाम खुद ही हो गई थी। आग से छह ही बच्चों की जान गई है।
पुलिस ने रविवार को जीटीबी अस्पताल की मोर्चरी में पोस्टमार्टम के बाद सभी मासूमों के शव उनके परिजनों के हवाले कर दिए हैं। क्राइम टीम के अलावा एफएसएल, बीएसईएस और दमकल विभाग की टीम ने अस्पताल परिसर का मुआएना किया है। शुरुआती जांच के बाद कुछ लोगों ने अस्पताल की पहली मंजिल पर बनी रसोई से आग लगने की बात की है। वहीं कुछ लोगों का दावा है कि ऑक्सीजन सिलिंडर रिफिलिंग के दौरान आग लगी।