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Delhi NCR News: दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रोबेशनर जज की बर्खास्तगी को सही ठहराया

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अमर उजाला ब्यूरो
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नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रोबेशन पर तैनात अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (एडीजे) अमन प्रताप सिंह की सेवा समाप्ति को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने माना कि अक्टूबर 2024 में की गई उनकी बर्खास्तगी सामान्य कार्रवाई थी, जो उनकी समग्र अनुपयुक्तता पर आधारित थी, न कि किसी दंडात्मक या कलंकित कार्रवाई पर। न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की खंडपीठ ने फैसला दिया कि प्रोबेशन अवधि के दौरान जज की सेवा समाप्ति दिल्ली उच्चतर न्यायिक सेवा नियम, 1970 के नियम 14 के तहत वैध है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परिवीक्षा पर नियुक्त न्यायाधीश को स्थायी नियुक्ति का कोई निहित अधिकार नहीं होता है। अमन प्रताप सिंह को अप्रैल 2023 में दिल्ली उच्चतर न्यायिक सेवा (डीएचजेएस) में दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर नियुक्त किया गया था। सितंबर 2024 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें द्वारका कोर्ट में एक वादकर्ता के साथ कथित तीखी नोकझोंक दिखाई दे रही थी। वीडियो में जज को खड़े होकर आवाज बुलंद करते और कथित रूप से असभ्य व्यवहार करते देखा गया था।
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वीडियो से पहले एसीआर में दर्ज की गई थी टिप्पणियां
हाईकोर्ट ने कहा कि वायरल वीडियो से पहले ही उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में गंभीर टिप्पणियां दर्ज की जा चुकी थीं। एसीआर में उनके अदालती व्यवहार को कई मौकों पर अधिवक्ताओं के प्रति अत्यंत असभ्य बताया गया था और उनके फैसलों की गुणवत्ता भी कम पाई गई थी। कोर्ट ने माना कि ये टिप्पणियां न्यायिक स्वभाव और निर्णय लेने की क्षमता से जुड़ी मूल विशेषताओं पर आधारित हैं, जो किसी जज की निरंतरता के लिए केंद्रीय महत्व रखती हैं।
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