दिल्ली हाईकोर्ट ने मेट्रो सिस्टम को दिव्यांगों फ्रैंडली और स्टैप फ्री बनाने के लिए लंदन मेट्रो सिस्टम का अनुसरण करने के निर्देश दिए हैं। पीठ ने कहा कि दिल्ली मेट्रो सिस्टम को लंदन ट्यूब से प्रेरणा लेनी चाहिए, जहां मेट्रो स्टेशन से सड़क परिवहन की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन दिल्ली सरकार राजधानी में पर्याप्त बसें भी नहीं ला पा रही है।
हाईकोर्ट की मुख्य कार्यवाहक न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने कहा कि जिस तरह लंदन परिवहन विभाग ने अपने ट्यूब स्टेशनों तक बिना कदम बढ़ाए पहुंचने का सिस्टम तैयार किया है। उसी तरह दिल्ली मेट्रो को यहां अनुसरण करना चाहिए।
पीठ ने कहा कि 21वीं शताब्दी में भी दिल्ली सरकार 20 सालों में दिल्ली की आवश्यकतानुसार 10 हजार लो फ्लोर बसें भी नहीं ला पाई है। पीठ ने डीएमआरसी को निर्देश दिए हैं कि वह लंदन समेत विश्व के उन सभी ट्रासंपोर्ट सिस्टम की जानकारी हासिल करें, जहां दिव्यांगों को मेट्रो सिस्टम से कैब और बसों तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का इस्तेमाल नहीं करना पड़ता है।
यह याचिका निपुण मल्होत्रा द्वारा दायर की गई, जिसमें दिव्यांगों के लिए ट्रांसपोर्ट सिस्टम के अनुरूप न होने के तथ्य दिए गए हैं। लो फ्लोर बसों की खरीद के संबंध में पीठ ने दिल्ली सरकार से कहा कि आप पर्यावरण से समझौता नहीं कर सकते, अगर कहीं भी लो फ्लोर बसें उपलब्ध नहीं हैं तो आप लंदन से लो फ्लोर बसें खरीदीए। चाहे कीमत कुछ भी हो। पीठ ने कहा जब दिल्ली सरकार अन्य चीजों पर फिजूल खर्ची कर सकती है तो ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए यह कदम क्यूं नहीं उठा सकती।