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Pollution: दिल्ली की खराब वायु गुणवत्ता पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- यह संवेदनशील मुद्दा, नहीं कर सकते आंखें बंद

Tue, 15 Nov 2022 01:11 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पीठ की यह टिप्पणी तब आई जब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि वह शहर में प्रदूषण से निपटने के लिए एक श्रेणीबद्ध योजना लेकर आया है। कोर्ट दिल्ली में वायु प्रदूषण से संबंधित वर्ष 2015 में शुरू की गई एक स्वत: संज्ञान याचिका पर सुनवाई कर रहा है। 
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह इस तथ्य पर अपनी आंखें बंद नहीं कर सकते कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता बहुत खराब से गंभीर श्रेणी के बीच आ रही है। अदालत ने अवैध निर्माण पर भी कड़ी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि हाल की हवा की स्थिति के कारण ही पिछले कुछ दिनों में राष्ट्रीय राजधानी में हवा की गुणवत्ता में मामूली सुधार हुआ है। आज तक हम बहुत खराब श्रेणी में हैं। पिछले कुछ हफ्तों से हम गंभीर से बहुत खराब श्रेणी के बीच झूल रहे हैं। यह संवेदनशील मुद्दा है।

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पीठ की यह टिप्पणी तब आई जब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि वह शहर में प्रदूषण से निपटने के लिए एक श्रेणीबद्ध योजना लेकर आया है। कोर्ट दिल्ली में वायु प्रदूषण से संबंधित वर्ष 2015 में शुरू की गई एक स्वत: संज्ञान याचिका पर सुनवाई कर रहा है। 

इससे पहले न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता कैलाश वासदेव ने शहर में बड़े पैमाने पर वनों की कटाई और शहर के जंगलों की स्थिति के बारे में अदालत को सूचित किया। वासदेव ने राष्ट्रीय राजधानी में कई क्षेत्रों की ओर इशारा किया जो पहले जंगल हुआ करते थे, लेकिन अब अनधिकृत कॉलोनियों में बदल गए हैं। उन्होंने कहा कि तेजी से वनों की कटाई से निपटने का एकमात्र तरीका इन अवैध निर्माणों को रोकना है। इस पहलू पर भी न्यायमूर्ति प्रसाद ने कहा कि ये निर्माण नियमों के उल्लंघन में हुए हैं और यह अधिकारियों को पता है। इस मामले पर अब एक फरवरी 2023 को विचार किया जाएगा।

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