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एजेंसी के एक अधिकारी ने बताया, सीबीआई ने उन तीन मामलों की जांच अपने हाथ में ली है जिनमें दिल्ली पुलिस ने रोहिणी के विजय विहार थाने में एफआईआर दर्ज की थी। एजेंसी ने फिर से एफआईआर दर्ज की है।
दीक्षित के खिलाफ दो मामले कथित रेप और आपराधिक तौर पर धमकाने से जुड़े हैं। जबकि एक मामला अज्ञात लोगों पर किया गया है। इन लोगों पर 19 दिसंबर, 2017 को आश्रम में जांच के लिए गई हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त कमेटी के काम में बाधा पहुंचाने का आरोप है।
हाईकोर्ट ने 20 दिसंबर को सीबीआई को लड़कियों और महिलाओं को कथित तौर पर बंधक रखने के आरोपों की जांच करने को कहा था। आश्रम में उन्हें कांटेदार तारों से घिरे ‘किले’ में लोहे के दरवाजों के पीछे ‘पशु जैसी स्थितियों’ में रखा गया था।
इस मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता का संज्ञान लेते हुए कार्यकारी चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी हरि शंकर की बेंच ने सीबीआई निदेशक को एसआईटी गठित करने को कहा था। उनसे मामले से संबंधित सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज अपने पास लेने को कहा गया था।
हाईकोर्ट ने सीबीआई को रोहिणी स्थित आश्रम और इसके संस्थापक व प्रमुख दीक्षित के खिलाफ दिल्ली में दायर एफआईआर, गायब लड़कियों से संबंधित शिकायतों की डेली डायरी, यौन अपराधों और आत्महत्या से जुड़े मामलों की जांच करने को कहा था।