दिल्ली हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को खतरनाक कुत्तों की 23 नस्लों पर प्रतिबंध लगाने वाले एक परिपत्र (सर्कुलर) को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई 9 अगस्त 2024 को होगी। हालांकि, उन्होंने मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि सरकार का सर्कुलर एक नीतिगत फैसला है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने कुछ नस्लों की पहचान की है तो यह विशेषज्ञों का निर्णय है।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि मैं घने जंगल में क्यों घुसूं। कुत्तों की विविधता की प्रकृति और विशेषताओं को देखूं और फिर इस निष्कर्ष निकालूं कि इस नस्ल को अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं। न्यायमूर्ति प्रसाद ने फिर भी कहा कि वह सरकारी परिपत्र के पैराग्राफ तीन की जांच करेंगे, जिसमें कहा गया है कि उक्त नस्लों के वर्तमान मालिकों को भी अपने पालतू जानवरों की नसबंदी करनी होगी।
केंद्र सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग ने बीती 12 मार्च को एक परिपत्र जारी कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को खतरनाक कुत्तों की 23 नस्लों पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा है।
इन प्रजातियों पर लगाया जाना है प्रतिबंध
जिन प्रजातियों पर प्रतिबंध लगाया जाना है वे पिटबुल टेरियर, तोसा इनु, अमेरिकी स्टैफर्डशायर टेरियर, फिला ब्रासीलिरो, डोगो अर्जेंटीनो, अमेरिकन बुलडॉग, बोअरबोएल, कांगल, मध्य एशियाई शेफर्ड कुत्ता (ओवचार्का), कोकेशियान शेफर्ड कुत्ता (ओवचार्का), दक्षिण रूसी शेफर्ड कुत्ता (ओवचार्का), टोर्नजैक, सरप्लानिनैक, जापानी टोसा, जापानी अकिता, मास्टिफ, टेरियर, भेड़िया कुत्ते, कैनारियो अकबाश कुत्ता, मॉस्को गार्ड कुत्ता, केन कोरो है।