पीठ ने यह टिप्पणियां उत्तरपूर्वी दिल्ली दंगा मामले में अभियोजन पक्ष की एक अर्जी पर सुनवाई करते हुए की। अर्जी में हाईकोर्ट के 13 जुलाई और 24 जुलाई के जमानत और पैरोल बढ़ाने के आदेशों को संशोधित करने की मांग की गई थी।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि दंगों के मामलों में अभियुक्तों द्वारा नियमित जमानत मांगने के बजाय पारिवारिक बीमारी या कुछ अन्य कारण बताकर जमानत मांगने के बाद इन्हें बढ़ाने को लेकर अदालत के निर्देश और दोनों आदेशों का दुरुपयोग किया जा रहा था।
वकील ने बताया कि दंगों के मामले में सुनवाई के दौरान लगभग 20 आरोपियों ने कुछ बहाने से अंतरिम जमानत ली थी और अब उच्च न्यायालय के जमानत विस्तार के आदेश का लाभ उठा रहे हैं।